अंतर्कलह और ऑडियो टेपों से उठे विवाद का सामना कर रही आम आदमी पार्टी (आप) के सामने एक और मुसीबत खड़ी हो गई है। दिल्ली सरकार के कानून मंत्री जितेंद्र तोमर की डिग्री के फर्जी होने का मामला सामने आया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने अवध विश्वविद्यालय से नकली स्नातक की डिग्री के आधार पर कानून की पढ़ाई की और फिर बतौर वकील पंजीकरण करवा लिया। हाईकोर्ट ने तोमर, बार काउंसिल ऑफ इंडिया, दिल्ली बार काउंसिल, चुनाव आयोग सहित सात को नोटिस जारी कर इस मामले में जवाब मांगा है।
न्यायामूर्ति राजीव शक्धर ने कहा यह मामला काफी गंभीर है। अदालत ने याचिकाकर्ता संतोष कुमार शर्मा के उस तर्क को भी खारिज कर दिया, जिसमें दायर याचिका को वापस लेने की इजाजत देने का आग्रह किया गया था। अदालत ने याची को फटकार लगाते हुए कहा कि आप पहले याचिका दायर कर तर्क रखते हैं कि यह काफी गंभीर मामला है फिर बाहर दबाव बनाकर याचिका वापस लेने का तर्क रखते हैं।
अदालत ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया को निर्देश दिया कि वह इस मामले की जांच करे, हम अलग से सुनवाई करेंगे। अदालत ने भागलपुर विश्वविद्यालय, अवध विश्वविद्यालय व विश्वनाथ सिंह इंस्टीटयूट ऑफ लीगल स्टडीज कॉलेज को भी नोटिस जारी किया है। मामले की सुनवाई 27 अप्रैल तय की है। इस बीच दिल्ली बार काउंसिल ने भी तोमर को नोटिस भेजा है।
शर्मा ने आरोप लगाया है कि तोमर ने अवध विश्वविद्यालय से नकली स्नातक की डिग्री के आधार पर भागलपुर विश्वविद्यालय से संबद्ध विश्वनाथ सिंह इंस्टीटयूट ऑफ लीगल स्टडीज कॉलेज में दाखिला लिया।
वहां से कानून की डिग्री लेने के बाद दिल्ली बार काउंसिल में बतौर अधिवक्ता पंजीकरण करवा लिया। आरटीआई के जवाब में डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय-फैजाबाद के परीक्षा नियंत्रक ने 22 जनवरी 2015 को पत्र भेज कर बताया कि जांच के बाद स्पष्ट हुआ है कि तोमर की उपाधि, अंकपत्र एवं अनुक्रमांक पूरी तरह फर्जी हैं।