पुराने कुओं के माध्यम से भूजल किया जाता है रिचार्ज
एनएसयूटी वर्तमान में जिस जगह पर बना हुआ है, कभी यहां पर बड़ी संख्या में कुएं हुआ करते थे। हालांकि, साल 1990 में द्वारका सेक्टर तीन की यह जमीन विश्वविद्यालय को मिल गई। इसके बाद यहां से कई कुओं का अस्तित्व खत्म हो गया। वर्तमान में यहां पांच कुएं हैं, जिनका इस्तेमाल विश्वविद्यालय द्वारा वर्षा जल संचयन के लिए किया जाता है। विश्वविद्यालय परिसर में बनी सड़कों के दोनों ओर छोटी नालियां बनी हुई हैं।
बारिश का पानी इन नालियों के माध्यम से कुओं तक पहुंचता है। कुएं पर पानी को तीन स्तर पर शोधित करने के बाद उसे कुएं में छोड़ दिया जाता है। बीते कई वर्षों से विश्वविद्यालय बारिश के पानी को सहेजने का काम कर रहा है। हाल ही में दिल्ली जल बोर्ड की मदद से वर्षा जल संयंत्र लगाया गया है, जिसके माध्यम से इमारतों पर गिरने वालो पानी को सरंक्षित किया जाता है। इससे जहां एक तरफ मानसून में पानी का सरंक्षण हो जाता है वहीं, परिसर में जलजमाव की समस्या भी नहीं होती है।