पुलिस ने मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी। एएटीएस (एंटी ऑटो थेफ्ट स्क्वायड) और स्पेशल स्टाफ के इंचार्ज संदीप गोदारा व अन्यों की टीम को भी मामले की जांच जांच के लिए लगाया गया। पुलिस ने आरोपियों के फरार होने वाले रूट के करीब 300 सीसीटीवी कैमरों को खंगाला। पुलिस की जांच पटेल नगर से पंजाबी बाग के बीच रही।
जांच के दौरान पता चला कि आरोपियों ने लूट के बाद वारदात में इस्तेमाल बाइक को पास की एक पार्किंग में खड़ा किया। बाद में वह ऑटो में सवार होकर पंजाबी बाग पहुंचे। इसके बाद वह ई-रिक्शा में सवार होकर कश्मीरी गेट पहुंचे। दोबारा आरोपियों ने एक ऑटो लिया और फिर लोनी पहुंच गए।
कई दिनों की जांच के बाद पुलिस की टीम को पता चला कि हत्या के आरोप में जेल में बंद आरोपी सूरज ठाकुर कुछ दिनों पहले जमानत पर जेल से बाहर आया था। वह भी वारदात में शामिल है। जांच के बाद एक टीम को फौरन नैनीताल, रुद्रपुर और हरिद्वार भेजा गया। पुलिस की भनक लगते ही आरोपी वहां से भागकर वापस दिल्ली आ गए।
टीम ने बादल और राजेंद्र नामक आरोपियों को राजघाट से गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद बाकी तीनों आरोपियों को मोती नगर, पलवल और सनलाइट कालोनी से गिरफ्तार कर लिया गया। जांच के दौरान पता चला कि इन लोगों ने 31 मई को बुराड़ी इलाके में एक दुकानदार से 40 हजार रुपये भी लूटे थे। पुलिस पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ कर मामले की छानबीन कर रही है।
लूट की रकम से मास्टर माइंड ने किया भंडारा
पुलिस की पूछताछ में वारदात के मास्टर माइंड अनिल सिंह रावत ने बताया कि वारदात को अंजाम देने के बाद उसने अपने एरिया में एक भंडारे का आयोजन किया था। इसमें बड़ी संख्या में लोगों को खाना खिलाया गया था। बाद में सभी आरोपी घूमने के लिए उत्तराखंड चले गए थे। लेकिन जैसे ही इन लोगों को पता चला कि पुलिस उनको ढूंढती हुई पहुंच गई है तो सभी भागकर वापस दिल्ली आ गए। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ कर मामले की छानबीन कर रही है।