अदालत ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार के समय हुए अतिरिक्त स्पैक्ट्रम आवंटन घोटाला मामले में आरोपी भारती सेल्युलर के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक सुनील मित्तल, एस्सार समूह के प्रमोटर रवि रूईया सहित अन्य आरोपियों के मामले की सुनवाई 28 मई तय की है।
पटियाला हाउस स्थित सीबीआई के विशेष न्यायाधीश ओपी सैनी के समक्ष पेश मित्तल के अधिवक्ता ने बताया कि मुवक्किल ने 19 मार्च 2013 के उस फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी हुई है जिसमें उन्हें बतौर आरोपी समन जारी किए गए थे। सर्वोच्च न्यायालय ने उनके मुवक्किल की याचिका पर सुनवाई के दौरान फैसला आने तक निचली अदालत में सुनवाई से मना किया था। अत: सुनवाई स्थगित की जाए।
वहीं, सीबीआई ने आरोप पत्र में मित्तल, रूईया व असीम घोष को अभियुक्त नहीं बनाया था, लेकिन अदालत ने संज्ञान लेते हुए सीबीआई के उस तर्क को खारिज कर दिया कि तीनों कंपनियों के किसी भी प्रतिनिधि के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए साक्ष्य नहीं हैं।
अदालत ने फैसले में कहा था कि मात्र सरकारी अधिकारियों व कंपनियों को दोषी बनाने से षड्यंत्र का मामला नहीं बनता। कंपनियों के मालिकों ने ही सरकारी अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर अतिरिक्त स्पैक्ट्रम आवंटित करवाया। स्पष्ट है कि इनके खिलाफ मुकदमा चलाया जा सकता है।
अदालत ने मित्तल, रूईया व असीम घोष के अलावा पूर्व दूरसंचार सचिव श्यामल घोष, तीन दूरसंचार कंपनियों भारती सेल्युलर, हचीसन मैक्स टेलीकॉम प्राइवेट (अब वोडाफोन इंडिया) व स्टर्लिंग सेल्युलर (अब वोडाफोन मोबाइल सर्विस) के खिलाफ समन जारी करके सभी को बतौर अभियुक्त पेश होने का निर्देश दिया था।
सीबीआई ने मामले में 21 दिसंबर, 12 को आरोप पत्र दायर किया था। आरोप है कि अतिरिक्त स्पैक्ट्रम के आवंटन से सरकारी खजाने को 846 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था।