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National Youth Day: मानसिक स्वास्थ्य बढ़ा रहा है चिंता, मोटापा ही नहीं... दुबलापन भी युवाओं को कर रहा बेचैन

Mon, 12 Jan 2026 01:48 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

अध्ययन के अनुसार, 49 प्रतिशत मोटापे से ग्रस्त और 47 प्रतिशत कम वजन वाले युवा मध्यम से गंभीर स्तर की बॉडी इमेज समस्या से गुजर रहे हैं।
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demo - फोटो : Freepik.com
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विस्तार
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देश के युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर समस्या सामने आ रही है। अब तनाव और आत्मविश्वास की कमी सिर्फ मोटापे से जूझ रहे युवाओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि दुबले-पतले दिखने वाले युवा भी अपने शरीर को लेकर असंतोष महसूस कर रहे हैं। शरीर की बनावट को लेकर तुलना, ताने और समाज की अपेक्षाएं युवाओं के मन पर नकारात्मक असर डाल रही हैं। जर्नल ऑफ एजुकेशन एंड हेल्थ प्रमोशन में प्रकाशित शोध में इसे बॉडी इमेज डिस्ट्रेस कहा जा रहा है, जो धीरे-धीरे युवाओं के आत्मविश्वास को कमजोर कर रहा है।

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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के संयुक्त अध्ययन में इस समस्या को आंकड़ों के साथ सामने रखा गया है। अध्ययन में एम्स की ओपीडी से जुड़े 18 से 30 आयु वर्ग के 1,071 युवाओं को शामिल किया गया।

अध्ययन के अनुसार, 49 प्रतिशत मोटापे से ग्रस्त और 47 प्रतिशत कम वजन वाले युवा मध्यम से गंभीर स्तर की बॉडी इमेज समस्या से गुजर रहे हैं। वहीं सामान्य या थोड़ा अधिक वजन वाले युवाओं में यह समस्या अपेक्षाकृत कम, करीब 36 प्रतिशत पाई गई। इससे यह साफ हो गया है कि यह समस्या सिर्फ मोटापे तक सीमित नहीं है। हर तीसरा युवा खुद को आत्मविश्वास की कमी से जूझता मानता है और हर चौथा युवा यह महसूस करता है कि उसे उसके शरीर के कारण जज किया जाता है।
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मोटे युवाओं में आत्म-संकोच और दुबले में अकेलापन
शोध से जुड़ी विशेषज्ञ न्यूट्रिशनिस्ट वारिशा अनवर के अनुसार, लंबे समय से माना जाता रहा है कि शरीर को लेकर असंतोष सिर्फ मोटे लोगों में होता है, लेकिन यह सोच गलत है। दुबले युवाओं में भी शर्मिंदगी, चिंता और खुद को लेकर असुरक्षा की भावना उतनी ही गहरी पाई गई है। कई युवा हर समय सोचते रहते हैं कि लोग उन्हें उनके शरीर के आधार पर आंक रहे हैं।

अध्ययन में सामने आया कि वजन के अनुसार मानसिक परेशानी का स्वरूप बदल जाता है। मोटापे से जूझ रहे युवाओं में आत्म-संकोच और आत्मविश्वास की कमी ज्यादा देखी गई, जबकि कम वजन वाले युवाओं में अकेलापन, चिंता और सामाजिक दूरी की भावना अधिक पाई गई।

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