40 सांसदों के फर्जी हस्ताक्षर कर उपराष्ट्रपति पद के लिए नामांकन करने वाले वाराणसी निवासी नरेन्द्र नाथ दुबे अडिग (50) गिरफ्तारी मामले में नया खुलासा हुआ है। नरेन्द्र को किसी भी सांसद ने ना तो समर्थन देकर हस्ताक्षर किए थे और ना ही अपना लैटर हैड दिया था।
आरोपी ने उनके समर्थन के फर्जी लैटर तैयार करने के अलावा खुद ही सभी सांसदों के फर्जी हस्ताक्षर किए। नरेन्द्र नाथ ने फर्जी साइन व लैटर हैड तैयार करने के लिए वाराणसी कोर्ट में साथ काम करने वाले महफूज को ढाई लाख रुपये दिए थे। सभी हस्ताक्षर वाराणसी कचहरी में बैठकर किए गए थे।
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गौरतलब है कि नरेन्द्रनाथ दुबे ने वर्ष 2012 में उपराष्ट्रपति का चुनाव लड़ने के लिए नोमिनेशन किया था। उपराष्ट्रपति का चुनाव लड़ने के लिए 20 सांसद प्रस्तावक, जबकि 20 सांसद समर्थक होने चाहिए। आरोपी ने अपने फार्म में 40 सांसदों के फर्जी हस्ताक्षर फर्जी किए थे।
हालांकि, बाद में नरेन्द्र दुबे का नोमिनेशन रद्द हो गया था। वर्ष 2012 में कांग्रेस से करीम नगर, आंध्रप्रदेश से सांसद पूनम प्रभाकर की शिकायत पर आर्थिक अपराध शाखा ने वर्ष 2012 में आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई थी।