स्वास्थ्य मंत्रालय का प्रस्ताव मंजूर हो गया तो आपके डॉक्टर को अंग्रेजी के बड़े (कैपिटल ) अक्षरों में नुस्खा लिखना पड़ेगा। भारतीय चिकित्सा परिषद (मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया) ने उस अधिसूचना के मसौदे को मंजूर कर लिया है, जिसमें डॉक्टरों के लिए दवाइयों के नाम अंग्रेजी के बड़े अक्षरों में लिखना जरूरी किया गया है।
दरअसल अंग्रेजी के छोटे अक्षरों में दवाइयों के लिखे नामों को पढ़ना मुश्किल हो जाता है। इस वजह से कई बार मरीजों को गलत दवा दे दी जाती है। केमिस्टों की शिकायत है कि सुनने में एक ही जैसे लगने वाले दो दवाइयों के नाम से कई बार मुश्किल खड़ी जाती है।
स्वास्थ्य मंत्रालय की मंजूरी के बाद अंग्रेजी के बड़े अक्षरों में दवाइयों के नाम लिखने की अनिवार्यता तय करने वाले मेडिकल काउंसिल का नोटिस प्रभावी हो जाएगा। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक स्वास्थ्य मंत्रालय इस सुझाव को लागू करने में दिलचस्पी दिखा रहा है।
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इसे हरी झंडी मिलने के बाद देश भर में डॉक्टरों को निर्देश देकर नए नियमों का पालन करने के लिए कह दिया जाएगा। दरअसल डॉक्टरों की पर्चियों में दवाइयों के नाम लिखने के तरीके पर बहस पुरानी है। लेकिन पिछले कुछ साल से इस मुद्दे ने जोर पक़ड़ लिया है और अब उनसे अंग्रेजी के बड़े अक्षरों में नाम लिखने की मांग की जाने लगी है।
सुनने में मिलते-जुलते नाम वाली दवाइयां मसलन - सेलिन (विटामिन सी), सेलिब (सेलेकोक्सिब - आर्थराइटिस के लिए), मेलाक्विन (मलेरिया रोधी दवा) मेहाक्विन (एंटीबायोटिक) एजू (एंटीबायोटिक) एजोक्स (चिंता रोधी दवा) के सिलसिले में अक्सर केमिस्टों के सामने दुविधा पैदा हो जाती है। स्वास्थ्य मंत्रालय के आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि अंग्रेजी के बड़े अक्षरों में दवाइयों के नाम लिखना अच्छा सुझाव है।