एसआई मनमोहन की टीम ने सीसीटीवी फुटेज खंगालना शुरू किया। जांच में पता लगा कि महिला 17 फरवरी को मादनपुर खादर इलाके स्थित रेहिंग्या कैंप में आ गई। यहां ये और 22 फरवरी तक दो रिश्तेदार कबीर व नूरइस्लाम के साथ रही। महिला रजिस्टर्ड रिफ्यूजी हैं। वह पहले डिटेंशन सेंटर में रहती थी।
यूएनएचसीआर से अनुरोध पर वह उत्तम नगर में किराए पर रहने लगी। शर्त ये थी कि वह दिल्ली में किसी के घर एक दिन से ज्यादा नहीं रुक सकती। रुकने पर उसे म्यांमार डिपोर्ट कर दिया जाएगा। महिला रेहिंग्या कैंप में पांच-छह दिन रुकी थी। ऐसे में उसे भारत से म्यांमार डिपोर्ट होने का डर सताने लगा।
पति को नहीं दी थी कालिंदी कुंज जाने की जानकारी
एसीपी जगदेव सिंह की टीम को पता लगा कि महिला को उसका पति बहुत मारता-पीटता था। वह पति को बिना बताए कालिंदी कुंज इलाके में चली गई थी। ऐसे में पति से बचने के लिए उसने सामूहिक दुष्कर्म की झूठी एफआईआर दर्ज कराई थी।
पैसे भी हड़पना चाहती थी
महिला ने पूछताछ में बताया कि दुष्कर्म का मामला दर्ज कराने पर उसे डीएलए से करीब 10 लाख रुपये मिलते। विदेशी पीडि़त महिला को दुष्कर्म का शिकार होने पर 10 का मुआवजा मिलने का प्रावधान है। इसके अलावा यूएनएचसीआर की ओर से भी पीडि़ता को पैसा देने का प्रावधान है। महिला यह पैसा भी हड़पना चाहती थी।