अदालत ने संदिग्ध चोर को पीट-पीट कर मार डालने के जुर्म में एक व्यक्ति को दस साल की सजा सुनाई है। अदालत ने कहा कि भले ही दोषी को लगता था कि पीड़ित चोर है, तो भी उसे कानून अपने हाथ में लेने का कोई अधिकार नहीं था।
अदालत ने कहा दोषी ने जो कृत्य किया वह पाषाणयुगीन था। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश मनोज जैन ने अपने फैसले में कहा कि इस तथ्य को नहीं भूला जा सकता कि दोषी ने पीड़ित की लाठी और पंखे की टूटी बेल्ट से उसकी पिटाई की।
भले ही उसे लगा हो कि पीड़ित चोर था तो भी वह कानून अपने हाथ लेकर उसे तुरंत ही सजा नहीं दे सकता। अदालत ने कहा कि इस तरह का कृत्य पाषाणकाल का है और पूरी तरह विकसित न्याय व्यवस्था के आधुनिक दौर में इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।