संध्या के नाम से रामवाटिका कॉलोनी में दो मकान थे। जबकि एक प्लॉट शिव वाटिका कॉलोनी में था। इसके अलावा अन्य स्थानों पर भी प्रॉपटी थी। जिनकी कीमत करीब डेढ़ करोड़ बताई जा रही है। संध्या जिस मकान में रहती थी वह पहले उसकी मां के नाम था।
संध्या ने धोखे से वह मकान अपने नाम करा लिया था। उर्मिला व संध्या के नाम एक अन्य मकान पर भी संध्या ने कब्जा कर रखा था। इससे नाराज उसकी मां उर्मिला पिछले तीन माह से अपने दामाद के साथ उसके घर में रहने लगी थी।
पति से विवाद होने के कारण कुछ समय से वो अपने मकान में अपने दोस्त अरुण के साथ रह रही थी। मां उर्मिला ने कई बार एतराज किया लेकिन संध्या ने मां की बात नहीं मानी। पूछताछ में उसने बताया कि वो बेटी की हत्या का आरोप अरुण पर लगाना चाहती थी।
संध्या के ससुर वीरेंद्र तोमर ने कोर्ट केस से परेशान होकर उसकी हत्या की साजिश रची। इसके लिए उसने अपने साथी मुकेश से मदद मांगी। मुकेश ने दिल्ली निवासी संदीप से वीरेंद्र की मुलाकात कराई। संदीप ने वीरेंद्र से हत्या करने के लिए साढ़े पांच लाख रुपये में सौदा तय किया। संदीप ने दिल्ली के दो शूटरों को हत्या का ठेका दिया।
संध्या ने काट ली थी बदमाशों की उंगली
बृहस्पतिवार को दोनों बदमाश महिला के घर प्रापर्टी डीलर बनकर पहुंचे और मकान बेचने की बातचीत करते हुए उसके घर में घुस गए और उसकी हत्या कर दी। पुलिस के मुताबिक महिला की हत्या के दौरान मृतका ने एक बदमाश की उंगली काट ली थी जो मौके पर ही गिर गई थी।
हत्या के बाद दिए शूटरों को दिए डेढ़ लाख
गोली मारने के बाद मौके से भागे बदमाश डॉक्टर के पास पहुंचे और प्राथमिक उपचार करवाया। वहीं पर आरोपी वीरेंद्र तोमर को बुलाकर सुपारी की रकम मांगी। वीरेंद्र ने डेढ़ लाख रुपये नगद देते हुए दो दिन में शेष चार लाख रुपये देने का वादा किया।
मेडिकल स्टोर संचालक ने दिया था साइनाइड
जांच के दौरान पुलिस ने बदमाशों को साइनाइड उपलब्ध करवाने वाले गांव के मेडिकल स्टोर संचालक कृष्णपाल को गिरफ्तार कर लिया। उसने बताया कि संध्या की मां ने बेटी की हत्या की साजिश में उसे शामिल करते हुए मोटी रकम देने का वादा किया था।