सावधानी बरती जाती तो मासूम बच्चों को चोटें नहीं आती। सेक्टर-16 रजनीगंधा अंडरपास में तेज रफ्तार के कारण स्कूल बस पिलर से टकरा गई। अगर अंडर पास में सुबह के वक्त पर्याप्त रोशनी होती और चालक बस की रफ्तार धीमी रखता तो हादसा नहीं होता।
इतना ही नहीं अंडरपास में पड़ी रेत और बदरपुर भी हादसे की वजह बने। कोतवाली सेक्टर-20 पुलिस मामले की जांच कर रही है। पुलिस के मुताबिक करीब 600 मीटर लंबे सेक्टर-16 के रजनीगंधा अंडरपास में बस तेज रफ्तार से निकल रही थी।
बस कार को ओवरटेक करने के चक्कर में बस चालक अंधेरे में रेत के ढेर को देख नहीं पाया। चंद सेकेंड में ही तेज रफ्तार बस पिलर से टकरा गई। हादसे में सबसे ज्यादा चोट चालक को ही आई। उसके दोनों पैर की हड्डी टूट गई है। हालांकि अहम सवाल यही है कि पुलिस इसके जिम्मेदार लोगों तक पहुंच पाएगी या पहले की तरह ही हुए हादसों की जांच कागजों में सिमट कर रह जाएगी।
एस 3 रूट की बस थी
हादसे की शिकार होने वाली बस एपीजे स्कूल की रूट एस-3 की थी। यह बस सेक्टर-11, 12, 22, 55, 56, से बच्चों को लेकर स्कूल जा रही थी। बस में 30 बच्चे बैठे हुए थे।
किसकी है लापरवाही
अंडरपास में कई पिलर क्षतिग्रस्त हैं। जिनकी मरम्मत का काम चल रहा है। अंडरपास में रेत, बदरपुर व अन्य सामान पड़े हुए हैं। लेकिन अथॉरिटी व पुलिस ने यहां पर कोई बैरिकेडिंग नहीं की। अगर बैरिकेडिंग की गई होती तो हादसा नहीं होता।
अंडरपास में अंधेरा ही अंधेरा
नोएडा प्राधिकरण ने नोएडा से डीएनडी के रास्ते दिल्ली आने जाने वाले लोगों के लिए यह अंडरपास बनाया था। अंडरपास में स्ट्रीट लाइट की भी व्यवस्था नहीं है। यहां दिन में भी अंधेरा रहता है।
पुलिस हादसे के कारणों की जांच कर रही है। इसमें लापरवाही बरतने वालों की पहचान की जा रही है। उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।- डॉ. अजयपाल शर्मा, एसएसपी।
हादसे के बाद ठेकेदार पर लगाया 20 हजार का जुर्माना
प्राधिकरण ठेकेदारों की मनमानी जारी है। अगर सेक्टर-16 अंडरपास के नीचे निर्माण सामग्री न पड़ी होती तो स्कूल बस हादसा नहीं होता। हादसे की सूचना पर आनन फानन में प्राधिकरण अधिकारी हरकत में आए और उन्होंने ठेकेदार पर 20 हजार रुपये का जुर्माना ठोक दिया और निर्माण स्थल पर डायवर्जन का बोर्ड लगा दिया है।
हालांकि अहम है कि इसके अलावा भी शहर में जहां भी निर्माण कार्य हो रहा है, वहां प्राधिकरण के अधिकारी एनजीटी के नियमों का पालन नहीं करा पा रहे हैं। निर्माण स्थलों पर आमतौर पर धूल उड़ती नजर आती है। मेट्रो स्टेशनों के नीचे भी यही हाल है।
अंडरपास में निर्माण सामग्री रखी गई थी। वहां डायवर्जन का बोर्ड भी नहीं लगा रखा था। हादसे की जानकारी के बाद ठेकेदार पर लापरवाही बरतने के आरोप में 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। - एमके मित्तल, परियोजना अभियंता, नोएडा प्राधिकरण।