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Monkeypox: स्मॉलपॉक्स का टीका नहीं लगा तो संक्रमण की संभावना अधिक, बच्चों-युवाओं को अधिक सतर्क रहने की जरूरत

Tue, 26 Jul 2022 06:53 PM IST
अनुराग सक्सेना अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

केंद्र सरकार के सफदरजंग अस्पताल के मेडिसिन विभाग के वरिष्ठ डॉक्टर जुगल किशोर के मुताबिक, मंकीपॉक्स एक संक्रामक बीमारी है। इससे उन लोगों में अधिक संक्रमण होने की संभावना अधिक है, जिन्होंने स्मॉलपॉक्स का टीका नहीं लिया है। इस वर्ग में युवा और बच्चे शामिल हैं।
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एलएनजेपी अस्पताल के एमडी डॉ. सुरेश कुमार - फोटो : ANI-फाइल फोटो
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विस्तार
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राजधानी में मंकीपॉक्स का पहला मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग सतर्क है। केंद्र भी दिल्ली की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। उधर, डॉक्टरों ने मंकीपॉक्स से बच्चों और युवाओं को अधिक सतर्क रहने की सलाह दी है। डॉक्टरों का कहना है कि अधिक उम्र वाले लोगों से ज्यादा कम उम्र वाले लोगों की इसके चपेट में आने की अधिक संभावना है।

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केंद्र सरकार के सफदरजंग अस्पताल के मेडिसिन विभाग के वरिष्ठ डॉक्टर जुगल किशोर के मुताबिक, मंकीपॉक्स एक संक्रामक बीमारी है। इससे उन लोगों में अधिक संक्रमण होने की संभावना अधिक है, जिन्होंने स्मॉलपॉक्स का टीका नहीं लिया है। इस वर्ग में युवा और बच्चे शामिल हैं। वजह यह कि इस टीके की खुराक 1980 में बंद कर दी गई थी।

डॉ. जुगल किशोर के मुताबिक, बच्चे संक्रमण से अंजान हैं और खेल-खेल में कई चीजों को छू लेते हैं। ऐसे में यदि वह किसी ऐसी वस्तु को छूते हैं, जिसे संक्रमित ने छुआ है या फिर किसी संक्रमित के संपर्क में आते हैं, तो रोग प्रतिरोधक तंत्र कमजोर होने के कारण जल्दी संक्रमित हो सकते हैं। ऐसे में अभिभावकों को भी अपने बच्चों के साथ सावधानी बरतने की आवश्यकता है। यदि घर में बच्चे छोटे हैं, तो अभिभावकों को बाहर ध्यान देना होगा कि वे संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से बचें।

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मंकीपॉक्स के इलाज के लिए केंद्र-दिल्ली सरकार के इकलौते लोक नायक अस्पताल के चिकित्सा निदेशक डॉ. सुरेश कुमार ने बताया कि यह कोरोना संक्रमण से उल्टा है। यानि जिन व्यक्तियों की उम्र अधिक है, उनके संक्रमित होने की संभावनाएं कम हैं। वहीं, कम उम्र वाले लोगों को यह अपनी चपेट में ले सकता है। इसका कारण स्मॉलपॉक्स का टीका लगा नहीं होना है। छोटे बच्चों को इससे संक्रमित होने का खतरा अधिक है। इस वजह से बच्चों को अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता है। 

गौरतलब है कि देशभर में इस बीमारी के चार मामले मिले हैं, जिसमें से तीन केरल और एक मरीज दिल्ली में मिला है। हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने मंकीपॉक्स को वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल की घोषणा करते हुए चिंता जताई है। विशेषज्ञों का कहना है कि बेशक यह तेजी से फैलने वाला रोग है, लेकिन इसमें मृत्युदर बहुत कम है। अफ्रीका में पांच लोगों ने इससे जान गवाई है, जबकि वैश्विक स्तर पर 75 देशों में इसके 16 हजार से अधिक मामले मिले हैं।
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