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ई-बसों में अब और सुरक्षित होगा सफर: एआई के जरिये रखी जाएगी निगरानी, चालक को उबासी आएगी तो रोक दी जाएगी बस

Tue, 14 Mar 2023 05:09 AM IST
आकाश दुबे सर्वेश कुमार, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

ई-बसों में यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से सीसीटीवी कैमरे, ड्राइवर मॉनिटरिंग सिस्टम, ब्रीथ एनलाइजर भी लगाए गए हैं। इसके बाद भी चालक से कोई गलती नहीं हो, इसके लिए चालक पर खास नजर रहेगी।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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इलेक्ट्रिक बसों में सफर करने वाले यात्रियों की सुरक्षा की कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) के जरिये निगरानी रखी जाएगी। चालक कंट्रोल रूम तक इसकी सूचना पहुंच जाएगी। चालक को उबासी आते ही बस तत्काल रुक जाएगी, फिर वहां से कोच (कंडक्टर) चालक से बस रोकने को कहेगा। चेहरे को पानी से धोने के बाद भी अगर चालक थकान या नींद महसूस कर रहा है तो बस आगे नहीं बढ़ेगी।  

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ई-बसों में यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से सीसीटीवी कैमरे, ड्राइवर मॉनिटरिंग सिस्टम, ब्रीथ एनलाइजर भी लगाए गए हैं। इसके बाद भी चालक से कोई गलती नहीं हो, इसके लिए चालक पर खास नजर रहेगी। सफर के दौरान अगर चालक को नींद या उबासी आती है तो यात्रियों को इसकी शिकायत करने की जरूरत नहीं होगी। 

सेंसर के जरिये चालक की फोटो कंट्रोल रूम में पहुंचेगी। कोच होस्ट (कंडक्टर) इसी जानकारी के आधार पर ड्राइवर को बस को रोकने के लिए कहेगा। चालक ने यात्रा शुरू करने से पहले शराब तो नहीं पी, इसकी जांच के लिए उन्हें ब्रीथ एनलाइजर टेस्ट से गुजरना होगा। इसमें पास होने पर चालकों को बसों की कमान सौंपी जाएगी। अगर बस चलाने के दौरान चालक को जम्हाई आती है तो सेंसर इसकी पहचान कर पूरा ब्योरा कंट्रोल रूम को भेजेगा।

80 किलोमीटर प्रतिघंटा से अधिक नहीं होगी रफ्तार
सेलवेल के सीईओ देवेंद्र चावला ने बताया कि बसों की अधिकतम रफ्तार 80 किलोमीटर प्रतिघंटा होगी। इससे अधिक रफ्तार पर बसें नहीं चलेंगी। अगर चालक ड्राइविंग के दौरान कोई गलती करता है तो इसकी भी जानकारी कंट्रोल रूम के पास पहुंचेगी। बचाव के लिए चालक को दोबारा प्रशिक्षण दिया जाएगा। अगर सुरक्षा के लिहाज से बड़ी चूक होती है तो ड्राइविंग की कमान छिन भी सकती है। चावला के मुताबिक बस के अंदर तापमान अगर 60 डिग्री सेल्सियस तक भी पहुंच जाता है तो इसका असर नहीं पड़ेगा। बैटरियों में अत्याधुनिक तकनीक और उपकरण लगाए गए हैं ताकि यात्रा में कोई रुकावट नहीं आए।
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सालाना 70 हजार टन कम होगा कार्बन उत्सर्जन 
सीईओ ने बताया की ई बसों से प्रदूषण नहीं होने की वजह से सालाना कार्बन उत्सर्जन में भी करीब 70 हजार टन की कमी आएगी। दिसंबर से पहले 100 बसें दिल्ली से दूसरे राज्यों के लिए शुरू होंगी। इससे यात्रियों को राहत मिलने के साथ ही पर्यावरण को स्वच्छ रखने में भी मदद मिलेगी।
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