गुड़गांव के प्रबुद्ध लोगों ने गुड़गांव का नामकरण ‘गुरुग्राम’ करने की मुहिम छेड़ दी है। इसके तहत नागरिकों के हस्ताक्षर कराए जाएंगे।
प्रदेश के मुखिया से लेकर देश के मुखिया तक के सामने मांग रखी जाएगी। मुहिम छेड़ने वालों ने गुरुग्राम से जुड़ी ऐतिहासिक प्रासंगिकता का हवाला देकर स्पष्ट किया कि इस शहर को गुरुग्राम का नाम देकर यहां पर्यटन की संभावनाओं को प्रभावी बनाया जा सकता है।
इसके लिए इन लोगों ने ‘गुरुग्राम गौरव संस्था’ का गठन भी किया है। संस्था से डिप्टी मेयर परमिंदर कटारिया, पार्षद राजेंद्र सिंह और दूसरे सामाजिक कार्यों में सक्रिय लोग जुड़े हैं। इन लोगों ने सोमवार को पत्रकार वार्ता कर बताया कि गुरुग्राम नामकरण होने से शहर को उसका सम्मान लौटाया जा सकता है।
यह महाभारतकालीन ऐतिहासिक शहर है। अनदेखी के कारण यहां की विरासतें अस्तित्व खो रही हैं। उन्हें बचाने और सम्मान दिलाने के लिए यह मुहिम छेड़ी गई है।
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पत्रकार वार्ता में शामिल परमिंदर कटारिया, राजेंद्र यादव के अलावा श्रीचंद गुप्ता, रामकुमार गुप्ता, अनिल संडूजा, अरुण अग्रवाल (सभी संरक्षक) संस्था के प्रधान विनोद शर्मा विजय जांगडा आदि ने बताया कि दशकों पूर्व शहर का नाम गुरुग्राम था।
यहां गुरु द्रोण ने कौरवों-पांडवों को शिक्षा-दीक्षा दी। भीम के नाम पर स्थापित भीमनगर में गुरु द्रोण का मंदिर है। यहां करीब 10 एकड़ में गुरु द्रोण की ओर से बनाया तालाब आज भी है। इस पर लोगों ने कब्जा कर लिया है।
गुरु द्रोण की पत्नी कृपी जिसका शहर में शीतला माता के नाम से भव्य मंदिर भी है। पांडवों की ओर से बनाया गया प्रकाशपुरी आश्रम है। इसका प्राचीन नाम पंडवाला था, बाद में यह पलावा होकर प्रकाशपुरी आश्रम हो गया।
खांडसा गांव में एकलव्य का मंदिर है। इन सभी का जीर्णोद्धार कर इस शहर को ऐतिहासिक पर्यटन केंद्र बनाया जा सकता है। इन लोगों ने कहा कि करनाल में कर्ण लेक हो सकती है तो गुड़गांव में इनका संरक्षण क्यों नहीं किया जा सकता है।
राजेंद्र यादव ने शहर का नाम गुरुग्राम कर यहां सरकारी यूनिवर्सिटी और मेडिकल कॉलेज खोलने की भी मांग की। इन लोगों ने कहा कि सही मायने में गुरुग्राम को एजुकेशन हब बनाया जाना चाहिए। इसके लिए संस्था ने शहरवासियों के सहयोग की कामना की है। जुलाई में संस्था इसके लिए हस्ताक्षर अभियान शुरू करेगी।