गुड़गांव के हाईवे की अव्यवस्थाएं लोगों की जिंदगियां लील रही हैं। पचगांव चौक खूनी चौराहा बन गया है। दो महीने में यहां दो दर्जन से अधिक दुर्घटनाएं हो चुकी हैं।
पिछले साल दिसंबर और इस साल के दो महीनों में चौक से सटे गांव पुखरपुर के पांच लोग जिंदगी से हाथ धो बैठे। सड़क का अधूरा निर्माण और जाम का खौफ दुर्घटना का सबसे कारण बन रहे हैं। आफत बिलासपुर चौक से शुरू होती है।
बिलासपुर चौक के साथ दूसरे स्थानों पर लगने वाले जाम से चालक इतने खौफजदा हैं कि 100 मीटर सड़क खाली देखते ही 100 की स्पीड पर दौड़ते हैं। यह रफ्तार अभी तक आसपास की कई जिंदगियां लील चुकी है।
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पचगांव चौक की बात करें तो सड़क के एक छोर से दूसरे छोर तक जाने के लिए जान जोखिम में डालनी पड़ती है। एक छोर से दूसरे छोर तक सड़क की चौड़ाई करीब 150 मीटर है। दरअसल, यहां कुंडली-मानेसर-पलवल (केएमपी) एक्सप्रेसवे का निर्माण ठप है।
निर्माण के नाम पर यहां पिलर खड़े कर दिए गए। चौक के आसपास सड़क खासी चौड़ी है। दोनों प्रमुख सड़कों के साथ सर्विस लेन भी चालू है, जो चौक पर आकर एक सड़क में तब्दील होती है। इस कारण वाहन चालक फर्राटा भरते यहां से गुजरते हैं।
पिलर की वजह से बाघनकी और जमालपुर की ओर से आने वाले वाहन चालकों को तेज रफ्तार से आते वाहन नजर नहीं आते। जो दुर्घटना की मुख्य वजह है।
ग्रामीणों ने बनाया आंदोलन का मन
चौक पर होती दुर्घटनाएं और बिलासपुर चौक पर लगने वाले जाम से परेशान लोगों ने अब बड़े आंदोलन का मन बना लिया है। ग्रामीण एकजुट होकर आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं। पुखरपुर के सरपंच कृष्ण कुमार, ग्वालियर के सिकंदर सरपंच, चांदला डूंगरवास के सुरेंद्र सरपंच, मोकलवास के ब्रह्म सरपंच, मनोज मोकलवास, सेना के पूर्व अधिकारी लालसिंह ने कहा कि चौक आसपास के ग्रामीणों के साथ दूसरे लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है।
चौक पर फुटओवर ब्रिज या पैदल पार पथ की खासी जरूरत है। अब ग्रामीणों को सड़क पर उतरना होगा। इन लोगों ने कहा कि दुर्घटना में कई लोग जान गंवा चुके हैं और कई लोग घायल हो चुके हैं। इसके विरोध में आंदोलन की रूपरेखा बनाई जा रही है। अगर यहां सुविधाएं नहीं दी गईं तो हाईवे को जाम किया जाएगा।