पुलिस की चुस्ती या यूं कहे कि बच्चों की किस्मत ने साथ दिया और अपहरणकर्ता बच्चों को ज्यादा दूर ले जाने में कामयाब नहीं हो पाया। समयपुर बादली रेलवे स्टेशन के बाहर बैक करते समय कार बंद हो गई। कार की चाबी पीड़ित प्रदीप जिंदल के पास थी, इसलिए पुश बटन से स्टार्ट होने वाली कार दोबारा नहीं चली।
पकड़े जाने के डर से बदमाश बच्चों को कार समेत छोड़कर फरार हो गया। इसके बाद चंद मिनटों में लोकेशन ट्रेस कर पुलिस वहां पहुंच गई। प्रदीप, एसएचओ शकरपुर के साथ जब वहां पहुंचे तो 20 से ज्यादा पीसीआर और 150 से अधिक पुलिसकर्मी वहां मौजूद थे। बच्चों को सुरक्षित पाकर प्रदीप की जान में जान आई। पुलिस ने कार की तलाशी ली तो कार से बीयर की केन मिली।
पुलिस के अनुसार, बच्चों ने बताया कि लगातार आरोपी सिगरेट पीने के अलावा बीयर पी रहा था। कार में पेट्रोल खत्म होने लगा तो आरोपी एक पंप पर पहुंचा। वहां उसने दो हजार रुपये का तेल डलवाया और भुगतान पेटीएम के जरिये प्रदीप से ही करवाया। प्रदीप ने बताया कि थाने से निकलने के बाद अपहरणकर्ता ने उसे 12-13 बार कॉल की।
वह बस यही कहे जा रहा था कि रुपयों का इंतजाम कर लो, मेरा आदमी जल्द ही पैसे लेने आएगा। वह बच्चों को लेकर मध्यप्रदेश जाएगा। रुपये मिलने के बाद बच्चों को सकुशल छोड़ देगा। रुपये न मिलने पर बच्चों को मार दिया जाएगा। एक टीम लगातार कार की लोकेशन ट्रेस कर रही थी। आरोपी आधी रात को दिल्ली की सड़कों पर बच्चों के साथ कार दौड़ा रहा था।
वह कभी आजादपुर तो कभी त्रिनगर और तिलक नगर जा रहा था। इस बीच आरोपी समयपुर बादली रेलवे स्टेशन पहुंचा तो कार बंद हो गई। चाबी प्रदीप के पास होने से कार स्टार्ट नहीं हो पाई और उसे भागना पड़ा। प्रदीप ने बताया कि रात करीब 10:22 बजे बच्चों को अगवा किया गया था। रात करीब 1.30 बजे बच्चों को सकुशल बरामद कर लिया गया।