दिल्ली में संगठित और असंगठित मजदूरों के लिए घोषित न्यूनतम मजदूरी 21 साल बाद बढ़ाने की तैयारी है। श्रम मंत्री गोपाल राय ने शुक्रवार को संवाददाता सम्मेलन में घोषणा की है कि न्यूनतम मजदूरी वृद्धि के लिए गठित समिति की अंतिम बैठक हो चुकी है। समिति फाइनल रिपोर्ट इसी सप्ताह दे देगी। सामान्यत: अप्रैल और अक्तूबर महीने में महंगाई भत्ते के कारण होने वाली वृद्धि से अलग गुणात्मक वृद्धि होगी।
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गोपाल राय ने कहा कि रिपोर्ट की सिफारिश कैबिनेट में लाएंगे और फिर उपराज्यपाल से स्वीकृति लेकर नई न्यूनतम मजदूरी घोषित की जाएगी। नई न्यूनतम मजदूरी में पुराने के मुकाबले 30-40 फीसदी तक वृद्धि संभव है।
इससे पहले न्यूनतम मजदूरी दिल्ली में 1994 में बढ़ी थी। बाकी साल में दो बार होने वाली वृद्धि महंगाई भत्ते के कारण होती है। राय ने कहा है कि सत्ता में आने के पहले आम आदमी पार्टी ने मजदूरों की भलाई में काम करने का वादा किया था।
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13 सदस्यीय त्रिपक्षीय समिति, दो उपसमिति गठित की गई
गोपाल राय
- फोटो : अमर उजाला
गोपाल राय ने कहा है कि न्यूनतम मजदूरी तय करने में मजदूर की 2731 कैलोरी के लिए जरूरी खाद्य पदार्थ, आवास, प्रकाश व ईंधन, वस्त्र और शिक्षा खर्च के आकलन को शामिल किया जाता है।
इसे तय करने के लिए एक 13 सदस्यीय त्रिपक्षीय समिति, दो उपसमिति गठित की गई थी। खाद्य पदार्थों की कीमत का सर्वेक्षण मंगोलपुरी, नारायणा, नरेला व झिलमिल समेत कुछ अन्य क्षेत्र में किया गया।
श्रम मंत्री ने कहा है कि 15 अगस्त को देश आजादी की 70वीं वर्षगांठ मनाएगा, लेकिन राजधानी समेत देशभर के मजदूर खराब हालत में हैं। दिल्ली सरकार न्यूनतम मजदूरी का तोहफा देगी।
अभी भी दिल्ली में न्यूनतम मजदूरी पड़ोसी राज्य यूपी, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल व बिहार से अधिक है। गोपाल राय ने कहा है कि न्यूनतम मजदूरी में 30-40 फीसदी वद्धि को देखते हुए अप्रैल, 2010 में ईपीएफ और ईएसआई की सुविधा 15 हजार रुपये मासिक वेतन तक दिए जाने के प्रावधान में बदलाव की मांग केंद्र सरकार से करेगी।
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