शाहीन बाग के कुछ स्थानीय लोग कालिंदी कुंज रास्ते को बंद किये जाने के खिलाफ हैं। सीएए-एनआरसी के विरोध से ज्यादा पानी, बिजली और अस्पताल जैसे मूलभूत सुविधाओं के लिए प्रदर्शन होता तो शायद देश में एक अलग संदेश जाता। यह चर्चाएं शाहीन बाग की पानी व चाय की दुकान पर वहां के रहने वाले लोग अक्सर करते नजर आते हैं। उनका आरोप है कि रास्ते को बंद करने के पीछे राजनीतिक साजिश है, जिसे चिंगारी देने का काम कुछ बाहरी लोग कर रहे हैं।
इस इलाके के लोग अमन-पसंद हैं, जिन्हें कोई भी कानून देश से बाहर नहीं निकाल सकता है। फिर भी कुछ लोगों के जिद व महत्वकांक्षा की वजह से शाहीन बाग में करोड़ों रुपये का कारोबार पूरी तरह से ठप पड़ा है। शाहीन बाग में मंगलवार को धरना स्थल से चंद कदम की दूरी पर गलियों में चल रही दुकानें खुली तो थी, लेकिन उन पर आने वाले ग्राहक डेढ़ महीने से नदारद हैं।
गली में पान व चाय की दुकान पर खड़े दुकानदार चल रहे प्रदर्शन के समर्थन में तो हैं, लेकिन उनका विरोध रास्ते को बंद किये जाने को लेकर है। एक दुकान पर चल रही चर्चा के दौरान मुहल्ले के मूल निवासी कहते हैं कि यह प्रदर्शन अपने ही लोगों को आर्थिक रूप से तोड़ रहा है। उनका कहना है कि अगर लोगों को प्रदर्शन करना है तो वह शाहीन बाग में विकास के लिए प्रदर्शन करें।
मुहल्ले में अस्पताल, स्कूल, खस्ताहाल सड़कों में सुधार होने की जरूरत है, जिस पर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है। कुछ राजनेता के चढ़ावे पर आकर चंद मुहल्ले वालों के साथ मिलकर बाहरी लोगों ने अपनी राजनीति चमकाने का शाहीन बाग को गढ़ बना लिया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रदर्शन में मुहल्ले के लोगों से अधिक बाहरी लोगों अधिक मात्रा में शामिल हैं। इसलिए वह चाहते हैं कि सीएए-एनआरसी का विरोध अन्ना आंदोलन की तर्ज पर होता तो शायद ज्यादा बेहतर होता।