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मिल्खा सिंह को क्या चाहिए?

Wed, 15 Jan 2014 01:18 PM IST
अमर उजाला, नई दिल्ली
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वर्ष 1958 के राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले फ्लाइंग सिख मिल्खा सिंह ने कहा कि खिलाड़ियों में भारत रत्न पर सबसे पहला हक हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद का था।
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सचिन तेंदुलकर को भारत रत्न मिलने की घोषणा से अन्य खिलाड़ियों को यह सम्मान मिलने का रास्ता साफ हुआ है। मिल्खा सिंह मंगलवार को बीएल कपूर अस्पताल के स्पोर्ट्स इंजरी क्लीनिक का उद्घाटन कार्यक्रम में बोल रहे थे।

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इस दौरान भारतीय कार रेसिंग चैंपियन गौरव गिल भी मौजूद थे। इस दौरान मिल्खा सिंह ने कहा कि 55 वर्षों में खेलों की दुनिया में काफी कुछ बदला है। आज खेल जगत कहीं ज्यादा प्रतिस्पर्धात्मक है। खिलाड़ियों को मुकाबले में बने रहने के लिए प्रशिक्षण और उन्नत चिकित्सा सुविधाएं मिलनी जरूरी है।
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उनके समय में मांसपेशियों में खिंचाव या कोई तकलीफ होने पर खिलाड़ी को सात से आठ माह तक मैदान से दूर रहना पड़ता थ, लेकिन अब ऐसी दवा और चिकित्सा उपलब्ध हैं, जिनकी मदद से खिलाड़ी जल्द ही मैदान पर खेलने के लिए तैयार हो जाते हैं।

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मिल्खा सिंह ने कहा 1958 में स्वर्ण पदक जीतने पर इंग्लैंड में तत्कालीन उच्चायुक्त रहीं विजय लक्ष्मी पंडित ने उन्हें गले लगा लिया था। उन्होंने प्रधानमंत्री पंडित नेहरू का संदेश भी दिया था। उन्होंने पूछा था कि मिल्खा सिंह को क्या चाहिए, तब मैंने जवाब दिया था कि मुझे कुछ भी नहीं चाहिए।
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