एनसीआर में मेट्रो का जाल फैलाने के लिए तमाम योजनाओं पर काम किया जा रहा है, लेकिन सभी योजनाएं अपनी समय सीमा से काफी पीछे चल रही हैं। मेट्रो विस्तार के मामले में दिल्ली के बाद नोएडा प्रमुख शहर है।
यहां तीन प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। खास बात यह है कि डीएमआरसी (दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन) की तर्ज पर एनएमआरसी (नोएडा मेट्रो रेल कॉरपोरेशन) का गठन कर नए प्रोजेक्ट शुरू किए जा रहे हैं।
तमाम बाधाओं के बीच दिलशाद गार्डन से गाजियाबाद के बीच मेट्रो का काम भी जारी है। 2017 के यूपी इलेक्शन से पहले मेट्रो की सभी परियोजनाओं को पूरा करने का दबाव है, लेकिन जिस रफ्तार से काम चल रहा है, उसे देखकर यह मुमकिन नहीं दिखाई पड़ता।
हरियाणा की पिछली सरकार भी मेट्रो प्रोजेक्ट अपने कार्यकाल में पूरा नहीं कर पाई थी। मसलन, बदरपुर से फरीदाबाद के बीच मेट्रो का काम तत्कालीन सरकार के कार्यकाल में शुरू हुआ था मगर सेवा की शुरुआत मनोहरालाल की सरकार में हुई। अब मेट्रो विस्तार के नए प्रोजेक्ट पर तय समय सीमा के अंदर काम पूरा कर पाने की चुनौती मौजूदा सरकार के सामने भी है।
नोएडा-ग्रेटर नोएडा मेट्रो
लंबाई ऱ् 29.767 किलोमीटर
लागत ऱ् 5,064 करोड़ रुपये
डेडलाइन ऱ् दिसंबर 2017
डीपीआर के मुताबिक 22 स्टेशन बनाए जाने थे, लेकिन तीन चरणों में 20 स्टेशनों का काम चल रहा है। जून 2017 से इस रूट पर मेट्रो का ट्रायल और दिसंबर 2017 से संचालन शुरू किया जाना है। एनएमआरसी अप्रैल तक संचालन शुरू करने का दावा कर रहा है, लेकिन यूपी इलेक्शन से पहले यात्रियों को मेट्रो का तोहफा मिल पाना मुश्किल लग रहा है, क्योंकि अब तक प्रोजेक्ट का 40 फीसदी काम ही पूरा हो सका है।
सिटी सेंटर-सेक्टर 62 मेट्रो
लंबाई ऱ् 6.675 किलोमीटर
लागत ऱ् 2,000 करोड़ रुपये
डेडलाइन ऱ् नवंबर 2018
मायावती के शासन काल में बनी इस योजना पर अखिलेश सरकार ने भी काफी देर से काम शुरू किया। प्रोजेक्ट का महज 15 फीसदी काम ही हो पाया है। देरी से शुरू हुए प्रोजेक्ट की डेडलाइन यूं तो नवंबर 2018 है, लेकिन तय समयसीमा से 9 महीने पहले फरवरी तक प्रोजेक्ट पूरा करने का दबाव है।
कालिंदी कुंज-बॉटेनिकल मेट्रो
लंबाई ऱ् 3.962 किलोमीटर
लागत ऱ् 845 करोड़ रुपये
डेडलाइन ऱ् दिसंबर 2016
मेट्रो का यह प्रोजेक्ट एनसीआर के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। बॉटेनिकल गार्डर से जनकपुरी वेस्ट तक 34.273 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर का 90 फीसदी काम पूरा हो गया है। नोएडा की सरहद में बॉटेनिकल गार्डन से कालिंदी कुंज सेक्शन का अभी 60 फीसदी काम ही हो पाया है। हालांकि, इस सेक्शन पर इस साल सितंबर से ट्रायल का दावा है, लेकिन काम की रफ्तार को देखते हुए ऐसा संभव नहीं लग रहा है।
दिलशाद गार्डन-गाजियाबाद मेट्रो
लंबाई ऱ् 7.41 किलोमीटर
लागत ऱ् 1,770 करोड़ रुपये
डेडलाइन ऱ् दिसंबर 2017
लंबे समय तक अटके रहे इस प्रोजेक्ट को अचानक रफ्तार दी गई। हालांकि, प्रोजेक्ट का काम शुरू होने के बाद जमीन और फंड से जुड़ी बाधाओं ने कई बार प्रोजेक्ट का रास्ता रोका। जिसके चलते प्रोजेक्ट एक साल देरी से चल रहा है। अब तक प्रोजेक्ट करीब 20 फीसदी पूरा हो सका है। इसकी डेडलाइन पहले दिसंबर 2016 तय की गई थी।
फरीदाबाद-बल्लभगढ़ मेट्रो
लंबाई ऱ् 3.205 किलोमीटर
लागत ऱ् 569.80 करोड़ रुपये
डेडलाइन ऱ् दिसंबर 2017
गैस पाइपलाइन और बिजली की हाईटेंशन लाइनें इस प्रोजेक्ट की बाधा बनी हुई हैं। मेट्रो अलाइनमेंट के रास्ते में निर्माण भी अभी हट नहीं सके हैं। हालांकि, प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए अभी 20 महीने का समय है लेकिन अड़चनें यूं ही बरकरार रहीं तो इसकी डेडलाइन मिस होना भी तय है। पूरे ट्रैक पर 540 पाइलिंग की जानी है। 30 पाइल तैयार हो चुके हैं। ट्रैक पर लगने वाले 224 यू गर्डर में से 15 तैयार हो चुके हैं।
मुंडका-बहादुरगढ़ मेट्रो
लंबाई ऱ् 11.182 किलोमीटर
लागत ऱ् 1991 करोड़ रुपये
डेडलाइन ऱ् दिसंबर 2016
दिल्ली से हरियाणा को जोडऩे के लिए मुंडका-बहादुरगढ़ मेट्रो प्रोजेक्ट पर 9 माह की देरी से काम चल रहा है। करीब 70 फीसदी काम पूरा हो चुका है। प्रोजेक्ट का 6.307 किलोमीटर हिस्सा दिल्ली ओर 4.875 किलोमीटर लंबा हिस्सा हरियाणा की सरहद में बन रहा है। पहले इसकी डेडलाइन मार्च 2016 थी जो बढ़ाकर दिसंबर कर दी गई।
कागजों में एक्सप्रेस-वे मेट्रो
नोएडा बॉटेनिकल गार्डन से सेक्टर 94 के रास्ते एक्सप्रेस वे के किनारे सेक्टर 142 तक करीब 11 किलोमीटर लंबा मेट्रो कॉरिडोर का निर्माण करने की योजना अभी कागजों में ही सिमटी है। हालांकि, इसके लिए नोएडा प्राधिकरण और डीएमआरसी के बीच वार्ता का दौर शुरू हो गया है।
फरीदाबाद-गुडग़ांव मेट्रो के दावे हवा हवाई
साइबर सिटी गुडग़ांव और औद्योगिक नगरी फरीदाबाद के बीच मेट्रो लिंक के दावे अभी हवाई हवाई हैं। तत्कालीन और मौजूदा सरकार दोनों शहरों की मेट्रो कनेक्टिविटी की बात कहकर केवल लोगों को सपने दिखाती रही हैं, जमीनी स्तर पर फिलहाल इस प्रोजेक्ट को शुरू करने की कोई तैयारी नहीं हुई है।
नोएडा-ग्रेटर नोएडा मेट्रो प्रोजेक्ट का काम बहुत तेजी से चल रहा है। तय समयसीमा से पहले मेट्रो संचालन की पूरी कोशिश की जाएगी। इस प्रोजेक्ट के सामने कोई बाधा अब नहीं रह गई है।-सौम्य श्रीवास्तव, कार्यकारी निदेशक-एनएमआरसी
एनसीआर के शहरों के बीच मेट्रो की कनेक्टिविटी बेहद जरूरी है। मेट्रो विस्तार की योजनाओं को जल्द से जल्द पूरा किया जाना चाहिए। फरीदाबाद, गुडग़ांव, नोएडा व ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक विकास को भी सहायता मिलेगी।-एसएस बांगा, जनरल एसेंबली मेंबर (सार्क)
मेट्रो अब एनसीआर की लाइफलाइन बन गई है। बेहतर परिवहन सेवाओं की जरूरत को ध्यान में रख सरकार को मेट्रो परियोजनाओं पर फोकस करने की जरूरत है। फरीदाबाद-गुडग़ांव मेट्रो का रास्ता भी साफ किया जाए।- एचके बत्रा, अध्यक्ष-फरीदाबाद चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री