प्रेम नगर की घटना, पड़ोसी युवक ने साथियों के साथ दिया वारदात को अंजाम
युवक को रॉड से पीटा, पुलिस संदिग्धों को हिरासत में लेकर कर रही पूछताछ
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। प्रेम नगर में सोमवार रात को टेंपो का शीशा तोड़ने पर पड़ोसी ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर एक मानसिक रूप से बीमार युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी। शव की शिनाख्त 32 साल के दीपक के रूप में हुई है। युवक का अस्पताल में इलाज चल रहा था। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेकर मामले की छानबीन कर रही है।
दीपक अपने बुजुर्ग पिता मदन सिंह के साथ अगर नगर, प्रेम नगर में रहता था। उसकी मां का देहांत हो चुका है। एक बहन है। उसकी शादी हो चुकी है। मदन सिंह ने बताया कि उनका बेटा मानसिक रूप से बीमार था। उसने पड़ोस में रहने वाले एक युवक के टेंपो का शीशा तोड़ दिया था। इस बात को लेकर पड़ोसी उसकी पिटाई करना चाहते थे। सोमवार रात को 9:20 बजे करीब 15 लोगों ने उनके घर पर पत्थरों से हमला कर दिया। उनके बेटे ने जवाब में हमलावरों पर बर्तन बगैरह फेंके। इसके बाद हमलावरों ने घर का दरवाजा तोड़ दिया और अंदर घुसकर उनके घर से सिलिंडर व अन्य सामान लेकर भाग गए।
कुछ देर बाद बेटा पीछे के दरवाजे से बाहर निकल गया। हमलावर वहां घात लगाए बैठे थे और उन्होंने दीपक को किसी तरह पकड़कर उसपर रॉड और लाठी डंडों से हमला कर दिया। उनलोगों ने तब तक उसकी पिटाई की जब तक वह अचेत होकर गिर नहीं गया। उसके बाद सभी आरोपी वहां से फरार हो गए। घटना की जानकारी पुलिस को दी गई। पुलिस अधिकारी ने बताया कि रात 11:18 बजे पुलिस को घटना की जानकारी मिली। पुलिस लहूलुहान दीपक को लेकर संजय गांधी अस्पताल लेकर गई। जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर पिता के बयान पर हत्या का मामला दर्ज कर लिया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि कुछ संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है और उनसे पूछताछ की जा रही है।
मां की मौत के बाद हो गया था मानसिक रूप से बीमार
दीपक के पिता ने बताया कि वह पहले पूरी तरह से ठीकठाक था। चार साल पहले उसकी मां की मौत के बाद से वह मानसिक रूप से बीमार हो गया था। उसके बाद अस्पताल में उसका इलाज चल रहा था। पिता ने बताया कि वह एक माह कपड़े की दुकान में काम करता था फिर दो महीने घर में रहता था। उसका पालन पोषण पिता ही कर रहे थे।
पुलिस मददगार होती तो बच सकती थी दीपक की जान
शीशा टूटने पर युवक की हत्या होने से पड़ोस में रहने वाले लोग अचंभित है। पड़ोसियों का कहना है कि अगर पुलिस मददगार होती तो आज दीपक की जान बच सकती थी। उनलोगों ने बताया कि दीपक मानसिक रूप से बीमार था। वह अकसर गली में लोगों को तंग करता था। पड़ोसियों ने कई बार पुलिस से संपर्क कर दीपक को अस्पताल में भर्ती कराने के लिए कहा, लेकिन पुलिस ने उसे भर्ती कराने से इंकार कर दिया। पड़ोसियों का कहना है कि बुजुर्ग पिता से उसका इलाज करवाना संभव नहीं था। बुजुर्गों की देखभाल और सुरक्षा का दावा करने वाली पुलिस अगर दीपक को अस्पताल में भर्ती करवा देती तो आज उसके बुजुर्ग पिता को अपने जवान बेटे के शव को कंधा नहीं देना पड़ता।
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