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एक ही तालाब में पानी पीने को मजबूर हैं आदमी और जानवर

Thu, 27 Aug 2015 05:35 PM IST
राजुद्दीन जंग/अमर उजाला, गुड़गांव
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नगीना में इक्कीसवीं सदी में भी लोग जानवरों के साथ पानी पीने को मजबूर हैं ये नजारा देश की राजधानी दिल्ली से मात्र 100 किलोमीटर दूर हरियाणा के मेवात जिले का है।
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ये कड़वी सच्चाई एक तालाब की है जहां से नगीना और राजस्थान के दर्जनों गांवों के लोग ने केवल खुद पानी पीते हैं बल्कि अपने जानवरों को भी इसी तालाब में पानी पिलाते हैं।

ये मनुष्यों का जानवरों के प्रति अनुराग का उदाहरण नहीं चूंकि जनसुविधाओं के इस दौर में उनकी मजबूरी को दर्शाता है।

मेवात की सियासी राजधानी कहे जाने वाले बड़कली चौक नगीना से मात्र दस किलोमीटर पश्चिम में बसे गांव घागस, शाहपुर, नोटकी, करहेड़ा, कन्साली तथा तिजारा राजस्थान के गांव कुलताजपुर, अरंडका, सरेटा, रूपबास के लोग अरावली पहाड़ी के उपर हरियाणा राजस्थान सीमा पर बने कदमताल नामक तालाब से पानी पीते हैं।
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इन दर्जनों गांवों का मुय रोजगार पशुपालन है ग्रामीण बकरियां, भेड़, गाय, भैंस, उंट से ही दूध और पशु बेचकर अपना घर चलाते हैं।

ये उन सैंकड़ों परिवारों की कहानी है जो अलसुबह अरावली में अपने मवेशियों को चराने निकलते हैं और शाम को देर तक लौटते हैं।

तो बीच में जब घर का पानी खत्म हो जाता है तो मजबूरन उन्हें तालाब में ही जानवरों के साथ पानी पीकर अपनी प्यास बुझानी पड़ती है।

कदमताल तालाब से दोनों राज्यों के गांवों की दूरी 5-7 किलोमीटर है यहां तक पहुंचने में पहाड़ियों से होते हुए 2 घंटे तक लग जाते हैं।

7 सौ मीटर के दायरे में फैले तालाब के चारों तरफ कदंब के पेड़ हैं ये पेड़ देश के कुछ ही हिस्सों में पाये जाते हैं। मान्यता ये भी है कि जहां भगवान श्रीकृष्ण के पांव पड़े वहीं कदंब के पौधे हुए।

काला पहाड़ की चोटी पर बने तालाब का पानी कभी सुखता नहीं है और बरसात का पानी ही यहां इक्टठा होता है। इस तालाब को सदियों पहले दादा मौजी खां नामक व्यक्ति ने बनवाया था।

घागस के चौधरी दियाला बताते हैं कि ग्रामीण पहाड़ पर बने तालाब में बारिश के पानी को एकत्रित करते हैं। फिलहाल जिले में 443 गांव हैं जिनमें से 26 गांवों में मीठा पानी है जबकि 417 गांवों में खारा जल है।

एक जून 2011 को कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी ने मांड़ीखेड़ा गांव में 205 करोड़ की लागत से राजीव गांधी रैनीवेल योजना के दूसरे चरण का आगाज किया था।

गांव कुलताजपुर के छुट्टन, चिरंजीलाल, आसु, रूपबास गांव के आमीन, सरेटा के सुरेश आदि पशुपालकों ने बताया कि सुबह जरूर घर से पानी ले जाते हैं लेकिन दोपहर और शाम तक पानी कदमताल तालाब में ही जानवरों के साथ पीना पड़ता हैं।

आसपास कोई सुविधा नहीं है पहाड़वाला तालाब ही नजदीक पड़ता है गांव तो 5 से 7 किलोमीटर दूर रह जाते हैं। घागस गांव के पशु पालक रिसाल, सुबदीन ने बताया कि मजबूरन तालाब का पानी पीकर ही प्यास बुझानी पड़ती है।

अरावली सेवादार खलील अहमद ने बताया कि रोजाना सैंकड़ों गवाले अपने जानवरों को इसी तालाब में पानी पिलाते हैं खुद भी पीते हैं और दोपहर में स्नान भी करते हैं।

खासबात ये है कि अरावली के इधर तथा उधर बसे गांवों को जोड़ने के लिए कोई सड़क नहीं है। सालों से नगीना तिजारा फोरलेन की बात जरूर सामने आती है लेकिन 4 सालों में तीन घोषणाऐं हो चुकी हैं।

घागस की महिला सरपंच मकसूदन ने बताया कि दो साल पहले घागस पंचायत ने कदमताल पहाड़ के उपर बने तालाब की खुदाई का काम मजदूरों से गहराई बढ़ाने के लिए कराया था। राजस्थान के कुलताजपुर ग्रामपंचायत ने भी कई बार खुदाई कराई है।
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