दिल्ली में सफाई व्यवस्था बड़ी चुनौती है। इसके 12 जोन को मिलाकर रोज 12000 टन कूड़ा निकलता है, लेकिन क्षेत्रफल के लिहाज से सफाई कर्मचारी नहीं हैं और न ही पर्याप्त मशीनरी है। करीब डेढ़ वर्ग किलोमीटर क्षेत्र की सफाई के लिए केवल एक सफाई कर्मचारी है। इस तरह पूरी दिल्ली साफ सुथरी रहे, संभव ही नहीं है। फिलहाल निगम ने इस साल सफाई व्यवस्था और कूड़े की ढुलाई पर खर्च बढ़ाने का निर्णय लिया है। देखना ये होगा कि इस साल कितने ऑटो टिपर मंगाए जाते हैं और कितने सफाई कर्मियों की भर्ती होती है। फिलहाल, सहभागिता योजना के अंतर्गत 500 कॉलोनियों को जीरो वेस्ट कॉलोनी मुहिम से जोड़ने की तैयारी है। करीब 120 से ज्यादा कॉलोनियां इसमें शामिल हैं।
सड़क किनारे 455 ढलाव बंद
एमसीडी ने सड़कों के किनारे बने करीब 455 ढलाव़ अब तक बंद किए। इनमें से 153 में डेयरी, 62 ईवी चार्जिंग स्टेशन, 81 सफाई कर्मचारी शेल्टर, 90 एमआरएफ (मेटेरियल रिकवरी फैसिलिटी) सेंटर, 125 एमसीटीएस (मदर एंड चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम) और 15 में लाइब्रेरी खोली है। चुनाव के बाद बचे हुए ढलाव घरों को उपयोग में लिया जाएगा।
पब्लिक टॉयलेट्स बनाए जाएंगे
बिल्ड ऑपरेट ट्रांसफर स्कीम के तहत 18 नए पब्लिक टॉयलेट्स बनाए जा रहे, निजी सहयोग से निगम इन्हें बना रहा। निगम के पर्यावरण प्रबंधन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक इस नीति के तहत 30 टॉयलेट्स बनाए गए हैं। निगम का कंपोस्टिंग साइटों की संख्या बढ़ाने, दिसम्बर तक लैंडफिल साइटों को समाप्त करने पर फोकस है।