हर दिन ठप हो रही वेबसाइट
सिविक सेंटर में समस्याएं लेकर पहुंचे नागरिकों से पता चला कि निगम की वेबसाइट आए दिन बंद पड़ जाती है, जिस वहज से निगम सेवाओं का सुचारु रूप से लाभ नहीं मिल पा रहा। निगम के आईटी डिपार्टमेंट पर हर महीने लाखों रुपये खर्च हो रहे, जबकि इसकी ऑनलाइन सेवाएं बेहद लचर बनी हैं। एमसीडी की वेबसाइट का सर्वर धीमा रहता है।
ऐसे मिलता से एमसीडी को संपत्ति कर
इधर निगम अधिकारियों के मुताबिक दिल्ली में करीब 55 लाख संपत्तियां हैं, जिनमें से करीब 80 फीसदी संपत्तियां अनधिकृत कालोनियों में हैं। बाकी 20 फीसदी (करीब 11 लाख संपत्तियां) नियमित कालोनियों में हैं, जिनसे संपत्तिकर मिलता है। पिछले वित्त वर्ष में एमसीडी को करीब 2300 करोड़ रुपये संपत्तिकर के रूप में हासिल हुआ था। निगम ने मौजूदा वित्त वर्ष में करीब 2000 करोड़ रुपये ज्यादा संपत्तिकर अर्जित करने का लक्ष्य रखा है। लेकिन इसकी कार्यशैली से बिल्कुल नहीं लगता कि ये लक्ष्य हासिल होगा।
जियो टैगिंग की साइट भी बंद रहने की शिकायत
नागरिकों की शिकायत है कि जियो टैगिंग करने की वेबसाइट भी अधिकतर बंद रहती है, जिसके कारण लोग अपनी संपत्ति को टैग नहीं कर पा रहे। निगम ने नियम बनाया है कि 31 अप्रैल तक जिन लोगों की संपत्तियां जियो टैग नहीं रहेंगी, उनको संपत्तिकर का एकमुश्त भुगतान पर मिलने वाली 10 फीसदी की छूट नहीं दी जाएगी। पहले लोगों को एकमुश्त संपत्तिकर भुगतान करने पर 15 फीसदी की छूट दी जाती थी। इस साल संपत्तिकर के भुगतान के लिए नागरिकों के लिए हर साल लाई जाने वाली आम माफी योजना भी नहीं लाई गई। इस योजना के माध्यम से भारी संख्या में संपत्तिकर जमा होता था।