एमसीडी सफाईकर्मियों के हड़ताल से बढ़ते कूड़े के ढेर को हटाने की कमान दिल्ली सरकार ने थाम ली है। कचरा हटाने की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग को सौंप दी गई।
लोकनिर्माण विभाग के मंत्री सत्येंद्र जैन को कूड़ा हटाने के लिए टास्क फोर्स गठित करने के निर्देश उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने दिए है। पूरे शहर से कचरा हटाने का आदेश भी दे दिया गया है।
दूसरी ओर सिसोदिया ने नगर निगम को पूर्व में दिए पैसे का खर्च सार्वजनिक करने की मांग की है, सिसोदिया ने अंदेशा जताया कि नगर निगम में कर्मचारियों का वेतन न देकर बड़ा घपला किया गया है।
एमसीडी कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से दिल्ली की सफाई का बीड़ा सरकार ने उठाया है। ढलावों से कूड़ा हटाने के लिए 91 विशेष टीमें गठित की है। ये टीमें दिल्ली के विभिन्न इलाकों से कूड़ा उठा रही हैं।
'राजनीतिक है ये हड़ताल'
लोक निर्माण विभाग ने कूड़ा ढोने के लिए 93 मशीनें लगाने को कहा है। मंत्री सतेंद्र जैन ने इस अभियान में जुटी टीम को निर्देश दिए है कि वे पूरी दिल्ली से कूड़ा उठाए।
दिल्ली को किसी भी सूरत में गंदा नहीं रहने दिया जाएगा। वॉटएप के माध्यम से उपमुख्यमंत्री सिसोदिया खुद कूड़ा हटाने की प्रक्रिया से अपडेट हो रहे है।
उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने पत्रकार वार्ता में बताया कि कूड़ा उठाने के लिए गठित टीम में विशेष गाड़ियां व प्रत्येक टीम में 10-10 सदस्य शामिल हैं।
ये टीमें तबतक सफाई का काम करेगी जबतक एमसीडी कर्मचारियों की हड़ताल समाप्त नहीं हो जाती। दिल्ली पुलिस का भी सहयोग लिया है।
सिसोदिया ने कहा कि नार्थ एमसीडी कर्मचारियों को दिसंबर तक का वेतन मिल गया है, जबकि पूर्वी दिल्ली एमसीडी के कर्मचारियों को नवंबर तक का वेतन दे दिया गया है। ऐसे में यह हड़ताल पूरी तरह से राजनैतिक है।
'चुप्पी साधे हुए है केंद्र सरकार'
उन्होंने कहा कि मैं दिल्ली के तीनों मेयर को चुनौती देता हूं कि वे अपने खर्च का ब्यौरा जारी करें, ताकि दिल्ली वालों को मालूम हो कि एमसीडी ने पैसा कहा खर्च किया। हड़ताल से न केवल आम जनता परेशान है, बल्कि एमसीडी कर्मचारियों के घर का बजट भी बिगड़ रहा है।
पिछले कई दिनों से खर्च का ब्यौरा मांगा जा रहा है, लेकिन तीनों मेयर यह जानकारी देने में टाल-मटोल कर रहे हैं। इसमें भी स्कैम मालूम पड़ रहा है। एमसीडी संपत्ति कर के ऐवज में लगभग 1500 करोड़ रुपये चाहे तो विभिन्न निकायों से ले सकती है।
डीडीए के खाते में एमसीडी का 25 हजार करोड़ रुपया बकाया हैं। उपराज्यपाल डीडीए के अध्यक्ष हैं और केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के अंर्तगत यह विभाग आता है, बावजूद इस मामले में केंद्र सरकार चुप्पी साधे हुए हैं। एमसीडी को केंद्र सरकार से यह पैसा लेना चाहिए।