खुद की पत्नी की करा दी शादी तो किसी ने विवाहित बेटी की
गाजियाबाद में सामूहिक विवाह योजना में हुई धांधली की जांच में आए दिन नए-नए खुलासे होते रहे हैं। ऐसी ही एक मामला है जिसमें मोदीनगर क्षेत्र में जनसुविधा केंद्र संचालक चार बच्चों के पिता मनोज ने अपनी पत्नी को ही अविवाहित बताकर 75 हजार रुपये की अनुदान राशि ले ली। मामले में जांच अधिकारी ने जनसुविधा केंद्र संचालक के खिलाफ रिपोर्ट बनाकर परियोजना निदेशक के पास भेजी गई। पूछताछ में पता चला कि मोदीनगर निवासी जनसुविधा केंद्र संचालक मनोज की सास श्रमिक बोर्ड में पंजीकृत हैं। इस पर उसने खुद को और पत्नी डॉली को अविवाहित बताकर सास को अनुदान दिलवा दिया।
13 साल के लड़के की मां ने भी खुद को बताया अविवाहित
जांच में ये बात भी सामने आई कि योजना के तहत मिलने वाले 75 हजार रुपये के अनुदान के लिए श्रमिकों ने न सिर्फ कागजों में हेरफेर बल्कि पहले से कायम रिश्तों को भी नजरअंदाज किया। जिसमें किसी की बेटी की तीन साल पहले शादी हो चुकी थी तो किसी की बेटी के पास 13 साल का बेटा है। इन लोगों ने भी खुद को अविवाहित बताकर योजना का लाभ लिया। जांच में फर्जीवाड़े का खुलासा होने पर श्रम विभाग के अधिकारियों ने सिहानी गेट थाने में छह केस दर्ज कराए थे।
कब अंजाम दिया गया यह घोटाला
यह घोटाला आज से करीब दस महीने पहले 24 नवंबर 2022 को हुआ। जिसमें रुपयों के लालच में दलाल ने सरकार तंत्र से साठगांठ करते हुए जोड़ों को शादी के मंडप पर बैठ दिया। हद तो तब हो गई जब किसी ने अपनी पत्नी तो किसी ने अपनी बहू तो किसी ने अपनी विवाहित बेटी को अविवाहित बताकर अनजान लोगों के साथ बैठ दिया। शादी के नाम पर फेरे और फोटो आदि भी लिए गए। इसके बाद यहीं से महिलाएं और परिवार अपने-अपने घरों को चले गए। कन्या विवाह सहायता के रूप सरकार की ओर से 75 हजार रुपये मिलने का लालच था। इसी का लाभ लेने के लिए कुछ श्रमिकों ने पहले से शादीशुदा बेटियों के गलत दस्तावेज बनवाकर योजना के लिए आवेदन कर दिया और अनुदान ले लिया। बाद में मामला खुलने पर पुलिस ने श्रम विभाग की तरफ से दी गई शिकायतों के आधार पर केस दर्ज भी किए।