अगर शादी ही संदेहास्पद है तो किसी शख्स को दहेज प्रताड़ना का दोषी नहीं ठहराया जा सकता। यह टिप्पणी जिला अदालत ने एक आरोपी को बरी करते हुए की।
थाना श्री निवासपुरी पुलिस ने 1997 में आरोपी के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का मामला दर्ज किया था। आरोप था कि उसने अपनी पत्नी को दहेज के लिए प्रताड़ित किया जिससे तंग आकर उसने आग लगाकर खुदकुशी कर ली।
साकेत जिला अदालत की महानगर दंडाधिकारी शिवानी चौहान ने आरोपी राजबीर को बरी करते हुए कहा कि मृतका को उसके पहले पति ने छोड़ दिया था और यह साफ नहीं है कि उसने दूसरी शादी करने से पहले तलाक लिया भी था या नहीं। महिला और आरोपी के बीच वैध विवाह हुआ था, यह बात भी पेश सबूतों से साफ नहीं है।
अदालत ने कहा कि दहेज प्रताड़ना की धारा लगाने के लिए जरूरी है कि पीड़िता को दहेज के लिए पति या उसके संबंधियों ने परेशान किया हो। इस मामले में मृतका और आरोपी का विवाह ही संदेहास्पद है। इसलिए आरोपी को मृतका का पति नहीं कहा जा सकता। पेश मामले में मृतका के माता पिता ने राजबीर के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए केस दर्ज करवाया था।