ऊंट किस करवट बैठेगा, इसका अंदाज लगाना अभी से मुश्किल है। चुनाव चढ़ने के साथ तस्वीर स्पष्ट होगी। लेकिन भाजपा को जोर ज्यादा लगाना पड़ेगा। इस बार कांग्रेस से वॉकओवर नहीं मिलने वाला है। दबी जुबान में भाजपा नेता भी मान रहे हैं कि मुकाबला अब एकतरफा नहीं है, लड़ाई कांटे की होगी। इसकी वजह कन्हैया कुमार को लेकर बनी बनाई धारणा है। दोनों प्रत्याशियों की अपनी-अपनी खूबी और खामी है। अच्छा वक्ता होने के साथ कन्हैया युवाओं के बीच पसंद किए जाते हैं। जबकि मनोज तिवारी की पूर्वांचली समाज में गहरी पैठ है।
बॉलीवुड का भी लगेगा तड़का
उत्तर-पूर्वी दिल्ली सबसे हॉट सीट बन गई है। प्रचार में बॉलीवुड का भी तड़का लगेगा। वाकपटुता भी खूब सुनने को मिलेगी। वोटों के ध्रुवीकरण की राजनीति भी होगी। चुनावी विश्लेषकों की माने तो वोटों के ध्रुवीकरण की सियासत भी तेज होगी। भाजपा के फायर ब्रांड नेता कन्हैया पर वार करेंगे तो कांग्रेस नेता के सिपहसालार भी भाजपा को घेरने में पीछे नहीं रहेंगे। ढपली की थाप पर जेएनयू की छात्र-छात्राएं भी झुग्गियों व अनधिकृत कॉलोनियों में भाजपा की पोल खोलने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। 2019 में जिस तरह से बेगूसराय लोकसभा चुनाव में मशहूर गीतकार जावेद अख्तर, शबाना आजमी, स्वरा भास्कर भी कन्हैया कुमार का प्रचार करने में पीछे नहीं रहे, वैसे ही उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भी इस तरह के फिल्मी सितारे नजर आएंगे।
राह नहीं आसान...
बीते लोकसभा चुनाव 2019 में मनोज तिवारी को 54 प्रतिशत वोट मिले थे। कांग्रेस और आप को मिलाकर 32 फीसदी वोट मिले थे। इस बार दोनों दल गठबंधन के तहत चुनाव लड़ रहे हैं। इस वोट प्रतिशत में बड़ा अंतर था। इसे पाटना कन्हैया कुमार के लिए चुनौती भी होगी। उधर, दो बार से सांसद रहे मनोज तिवारी को भी अपने क्षेत्र के कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करना आसान नहीं होगा। हालांकि, उनकी पत्नी क्षेत्र में घूमकर नाराजगी को पाटने में जरूर जुटी हुई हैं।
विशेषज्ञ बोले : रोचक होगा चुनाव
डीयू के प्रोफेसर व राजनीतिक विश्लेषक चंद्रचूड़ सिंह का मानना है कि कन्हैया कुमार की उम्मीदवारी से नार्थ ईस्ट दिल्ली का चुनाव रोचक हो गया है। दोनों उम्मीदवारों के अपने पॉजिटिव और नेगेटिव पॉइंट हैं। इतना जरूर है कि चुनावी नतीजे जो भी रहे, देश की राजनीति की दिशा दिल्ली लोकसभा चुनाव में जीतने वाले सांसद जरूर तय करेंगे।
पूर्वांचली वोटों के विभाजन की स्थिति में तिवारी को कैडर वोट बढ़त दे देंगे। लेकिन अगर मत विभाजन नहीं हुआ, कांग्रेस और आप ने एकजुटता दिखाई तो सत्ता विरोधी लहर का असर मनोज तिवारी पर भारी पर सकता है।
पीएम मोदी की लोकप्रियता का लाभ मनोज तिवारी को मिलेगा। जबकि कन्हैया कुमार को आम आदमी पार्टी के संगठन पर सवारी करनी होगी, जो बहुत आसान नहीं होगा।
संसदीय क्षेत्र में धर्म, जाति व वर्ग का समीकरण:
मुस्लिम-21.50 फीसदी
पिछड़ा वर्ग-21 फीसदी
ब्राह्मण-18 फीसदी
अनुसूचित जाति-17 फीसदी
गुर्जर-5.50 फीसदी
वैश्य-5 फीसदी
पंजाबी-5 फीसदी
जाट-4 फीसदी
(नोट: राजनीतिक दलों की तरफ से जुटाए गए अनुमानित आंकड़े)
विधानसभा में काम करने वाले फैक्टर
बुराड़ी, करावल नगर : पूर्वांचली व उत्तराखंड फैक्टर।
बुराड़ी, करावल नगर, घोंडा, और रोहतास नगर : ब्राह्मण फैक्टर।
सीलमपुर, मुस्तफाबाद, गोकलपुरी, सीमापुरी : मुस्लिम बहुल।
सीमापुरी व तिमारपुर : झुग्गी बस्ती का बाहुल्य।
विधानसभा व विधायक
आम आदमी पार्टी : सीमापुरी, मुस्तफाबाद, गोकलपुरी, घोंडा, सीलमपुर, रोहतास नगर, बावरपुर, बुराड़ी, तिमारपुर।
उत्तर पूर्वी संसदीय सीट
2009-2014: जय प्रकाश अग्रवाल कांग्रेस
2014-अभी तक: मनोज तिवारी भाजपा