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ढाई दशक से सरकारी फाइलों में लटकी मंझावली पुल परियोजना

Thu, 31 Mar 2016 09:37 AM IST
योगेश शर्मा/अमर उजाला, फरीदाबाद
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पुल - फोटो : प्रतीकात्मक चित्र
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यूं तो हरियाणा की सबसे पुरानी औद्योगिक नगरी फरीदाबाद और उत्तर प्रदेश का गेटवे कहे जाने वाले नोएडा-ग्रेटर नोएडा के बीच महज चंद कदमों का फासला है, लेकिन सरहदों ने एनसीआर के इन अहम शहरों को पास होकर भी दूर कर दिया।
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दो राज्यों के बीच यमुना नदी पर पुल के जरिये सफर आसान करने का सपना दिखाकर वोट की राजनीति होती रही। ढाई दशक बाद भी जनता अपने आपको ठगा सा महसूस कर रही है।साल 1989 में फरीदाबाद को ग्रेनो से जोड़ने के लिए मंझावली पर पुल बनाने की योजना तैयार हुई थी, जो आज तक सरकारी फाइलों से बाहर नहीं निकल सकी है।

केंद्र में नई सरकार का गठन होने के बाद फरीदाबाद के सांसद एवं केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने इसे ड्रीम प्रोजेक्ट की संज्ञा दे दी। सितंबर 2014 में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के हाथों 330 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट का शिलान्यास भी करा दिया गया।
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शिलान्यास का पत्थर लगे डेढ़ साल बीत गया है और जमीनी स्तर पर प्रोजेक्ट का अता-पता तक नहीं है। जब ड्रीम प्रोजेक्ट का ये हाल है तो दूसरी परियोजनाओं का अंदाजा खुद ब खुद लगाया जा सकता है। मंझावली ब्रिज के जरिये यमुना एक्सप्रेस-वे को एनएच-2 से सीधे जोड़ने की योजना है।

एनसीआर के लिए महत्वपूर्ण
मंझावली पुल परियोजना न केवल फरीदाबाद, नोएडा और ग्रेटर नोएडा के लिए बल्कि पूरे एनसीआर के लिए महत्वपूर्ण है। इसके बनने से साइबर सिटी गुड़गांव और आईटी सिटी ग्रेटर नोएडा की नजदीकियां बढ़ जाएंगी।

सोहना रोड के जरिये फरीदाबाद के रास्ते इन दोनों शहरों के बीच आवागमन आसान हो जाएगा। एनएच-2 (दिल्ली-आगरा हाईवे) के रास्ते दिल्ली होकर गाजियाबाद, नोएडा जाने वाले वाहनों के लिए यह प्रोजेक्ट बाईपास रोड का काम करेगा।

इससे नेशनल हाईवे और दिल्ली की सड़कों से ट्रैफिक का दबाव भी कम हो जाएगा। यमुना पर 700 मीटर लंबा ब्रिज बन जाने से दिल्ली-एनसीआर की तरक्की के रास्ते खुल जाएंगे।
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मिनटों का सफर घंटों में होता है तय

पुल
मंझावली पुल बन जाने के बाद फरीदाबाद एनएच-2 से ग्रेटर नोएडा यमुना एक्सप्रेसवे के बीच की दूरी महज 20 किलोमीटर हो जाएगी। दोनों शहरों के बीच 20 से 25 मिनट में सफर तय किया जा सकेगा, लेकिन मौजूदा समय में फरीदाबाद से ग्रेटर नोएडा जाने के लिए बदरपुर बॉर्डर, सरिता विहार, जसोला कालिंदी कुंज के रास्ते नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस-वे होते हुए करीब 58 किलोमीटर लंबा सफर तय करना पड़ता है, जिसमें कम से कम दो से ढाई घंटे का समय लगता है।

आखिर क्यों अटका प्रोजेक्ट
डीपीआर में खामियां 
डेढ़ साल पहले मंझावली ब्रिज प्रोजेक्ट की डीपीआर तैयार कर हरियाणा ने केंद्र सरकार को भेजी थी। डीपीआर में जमीन अधिग्रहण का एस्टिमेट जोड़कर भेज दिया गया था जिसे केंद्र सरकार ने रद्द कर दोबारा इसे तैयार करने के निर्देश दिए।

यूपी पीडब्ल्यूडी सुस्त 
मंझावली गांव से शुरू होने वाला ब्रिज ग्रेटर नोएडा के अट्टा गुजरान-यमुना एक्सप्रेसवे पर जाकर मिलेगा। यूपी के हिस्से में ब्रिज और सर्विस रोड की अलाइनमेंट को बदलने से योजना का प्रारूप समय से तैयार नहीं हो पाया।

संशोधित डीपीआर भी फंसी
हरियाणा पीडब्ल्यूडी ने प्रोजेक्ट की डीपीआर में संशोधन कर पिछले साल दिसंबर में केंद्र सरकार को भेज दिया था, लेकिन अब तक केंद्र से डीपीआर मंजूर नहीं हुई है।

मुआवजा राशि तय नहीं 
यमुना ब्रिज को ग्रेटर फरीदाबाद व फरीदाबाद से जोड़ने के लिए सड़क बनाई जानी है। इसके लिए किसानों की जमीन का अधिग्रहण होना है। अब तक मुआवजा राशि ही तय नहीं हो सकी है।
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