प्रवर्तन निदेशालय ने महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी एप से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पिछले हफ्ते नए दौर की तलाशी के बाद 573 करोड़ रुपये की प्रतिभूतियां, बाॅन्ड और डीमैट खाते जब्त किए हैं। ईडी ने सोमवार को बताया कि उसने पाया है कि सट्टेबाजी मंच और उससे जुड़े सिंडिकेट के जरिये उत्पन्न आपराधिक आय को देश से बाहर ले जाया गया और बाद में शेयर बाजारों में निवेश किया गया।
महादेव सट्टेबाजी एप मामला तब सुर्खियों में आया जब ईडी ने कुछ साल पहले दावा किया कि छत्तीसगढ़ के कई उच्च पदस्थ राजनेता और नौकरशाह इस एप से जुड़े अवैध संचालन और उसके बाद के मौद्रिक लेन-देन में शामिल थे। एप के दो मुख्य प्रवर्तक सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल राज्य से हैं। ईडी पहले भी इस मामले में तलाशी ले चुका है। ईडी के मुताबिक आम निवेशकों को धोखा देने के लिए कुछ छोटे और मध्यम उद्यमों (एसएमई) क्षेत्र की प्रतिभूतियों के कृत्रिम मूल्य उतार-चढ़ाव को बढ़ावा देने के लिए कुछ कंपनियों में धन लगाया गया था।
तलाशी के दौरान इनमें से कुछ निवेशों की पहचान कर उन्हें फ्रीज कर दिया गया है। स्टॉक मूल्य में हेरफेर की पूरी कार्यप्रणाली का पता लगाने के लिए जांच चल रही है। छापों के दौरान की गई जब्ती से ऐसी सूचीबद्ध संस्थाओं के प्रवर्तकों की भूमिका का भी पता चला है, जिन्होंने शेयरों के तरजीही निर्गम, प्रवर्तकों/प्रवर्तक-नियंत्रित शेयरों की बिक्री और शेयर वारंट जारी करने की आड़ में इस दागी धन को अपनी कंपनी में लगाया है। इनमें से कुछ सूचीबद्ध कंपनियों का उपयोग शेयर बाजारों में निवेश के लिए भी किया गया था।