फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मांझा प्रतिबंध पर उपराज्यपाल-उपमुख्यमंत्री में खींचतान, फाइल पर फंसा पेंच   

Thu, 18 Aug 2016 07:54 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
LG Najeeb jung
विज्ञापन
दिल्ली में चीनी मांझा समेत धारदार मांझे की डोर उपराज्यपाल कार्यालय और उपमुख्यमंत्री कार्यालय के बीच उलझ गई है। 
विज्ञापन


अधिसूचना में देरी को लेकर उपमुख्यमंत्री ने संवाददाता सम्मेलन करके सबूत दिया कि उपराज्यपाल कार्यालय ने चार दिन जनता के जीवन से जुड़ी फाइल रोके रखी और 7 दिन पर्यावरण सचिव ने अपने पास रखी। 

दूसरी तरफ उपराज्यपाल कार्यालय ने बयान जारी करके उपमुख्यमंत्री के बयान को गलत करार दिया है। राजनिवास से जारी बयान में कहा गया है कि उपमुख्यमंत्री ने मीडिया को बताया है कि 5 अगस्त की शाम 5:46 बजे उपराज्यपाल कार्यालय फाइल भेजी गई थी जो 9 अगस्त को शाम 3:57 बजे वापस आई। 
विज्ञापन

उपराज्यपाल कार्यालय ने कहा एक दिन में लौटा दी फाइल

मनीष सिसोदिया
इस पर उपराज्यपाल कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि यह पत्र आठ अगस्त को डायरी नंबर 25849 से मिली जो 9 अगस्त को वापस भेज दी गई। राजनिवास ने भी उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की तरह फाइल मॉनिटरिंग की कॉपी मीडिया को भेजी है। 

दोनों फाइल मॉनिटरिंग में विरोधाभास है। उपराज्यपाल कार्यालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो अधिसूचना उपराज्यपाल को भेजी गई थी वह प्रारूप अधिसूचना है। 

जिसमें कहा गया है कि सूचना दी जाती है उक्त प्रारूप प्रकाशित होने के 60 दिन तक मिलने वाली आपत्तियों व सुझावों पर विचार किया जाएगा। उपराज्यपाल के सामने स्वीकृति के लिए अंतिम अधिसूचना प्रस्तुत नहीं की गई है जिसमें अंतत: और सख्ती से चीनी मांझे पर प्रतिबंध की बात कही गई हो।
विज्ञापन

'उपमुख्यमंत्री कार्यालय ने 20 सेकेंड में फाइल को दे दी थी मंजूरी'

मनीष सिसोदिया
उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने मुख्यमंत्री के साथ किए गए संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि दिल्ली सरकार में एनआईसी में फाइल मूवमेंट का रजिस्टर ऑनलाइन है उसमें साफ है कि 5 अगस्त को पर्यावरण मंत्री के यहां से फाइल उपराज्यपाल के पास गई। 

लेकिन उपराज्यपाल कार्यालय में ठीक से एंट्री नहीं है। फिर 9 अगस्त को उपराज्यपाल कार्यालय से फाइल उपमुख्यमंत्री के पास दोपहर 3 बजकर 57 मिनट पर आई जिसे 20 सेंकेण्ड में साइन करके भेज दिया गया। 

पर्यावरण मंत्री डेंगू के कारण अस्पताल में थे जहां भेजकर 20 मिनट में उसी दिन फाइल साइन करवाई गई। इसके बाद मुख्य सचिव के पास फाइल चली गई जहां से तुरंत साइन होकर पर्यावरण सचिव के पास उसी दिन फाइल चली गई। 

7 दिन यहां लगे, सात दिन जिस ऑफिसर ने लगाए। ये अंवेदनशीलता की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए कि 4 दिन उपराज्यपाल कार्यालय और 7 दिन पर्यावरण सचिव ने क्यों लगाए? लोगों की जान जारी रही।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें