लोकसभा चुनाव के लिए दिल्ली में नामांकन के लिए मात्र दो ही दिन शेष बचे हैं लेकिन कांग्रेस-आप के बीच संभावित गठबंधन की उलझी डोर के चलते कांग्रेस ही नहीं बल्कि भाजपा भी अपने प्रत्याशियों के नाम तय नहीं कर पा रही है। दरअसल भाजपा दोनों के बीच गठबंधन के प्रत्याशियों के दम को परखने के बाद ही अपने पत्ते खोलना चाहती है। पार्टी बीते एक माह से प्रत्याशियों की जल्द घोषणा करने का दावा करती रही है लेकिन कर नहीं पाई।
चुनाव प्रक्रिया शुरू हुए एक माह बीतने के बाद भी राजधानी में सातों सीटों पर कब्जा करने वाली भाजपा इस बार असमंजस में है। भाजपा ने पहले मार्च में ही उम्मीदवारों की घोषणा का दावा किया था। वहीं कांग्रेस-आप के बीच संभावित गठबंधन को लेकर दिन प्रति दिन यूटर्न लिया जा रहा है। आप ने भले ही अपने सातों प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है और उनकी ओर से चुनाव प्रचार भी जारी है बावजूद उनके तीन प्रत्याशी व कार्यकर्ता असमंजस में हैं कि प्रचार करें या न करें।
दरअसल, इन तीन प्रत्याशियों को संकेत मिल चुका था कि यदि गठबंधन हुआ तो उनका पत्ता कट जाएगा। ऐसे में वे प्रचार करें भी कैसे। जब पता ही नहीं है कि उन्हें चुनाव लड़ना है या नहीं। भाजपा के सात सीटों पर सांसद है बावजूद इसके उनकी और से चुनाव प्रचार न के बराबर है। बाहरी दिल्ली से प्रवेश वर्मा व दक्षिणी से रामवीर सिंह बिधूड़ी प्रचार में जुटे हैं। चांदनी चौक से दावा ठोक रहे केंद्रीय मंत्री विजय गोयल भी रोजाना चुनाव प्रचार में लगे हैं।
सूत्रों के अनुसार भाजपा शनिवार को सीटों की घोषणा करने वाली थी लेकिन सोमवार तक कांग्रेस-आप का निर्णय टलने पर भाजपा ने फिर चुप्पी साध ली। भाजपा नेताओं का कहना है मंगलवार नामांकन की अंतिम तिथि है ऐसे में सोमवार को तो हर हाल में तस्वीर साफ करनी ही होगी। हालांकि भाजपा का मानना है कि यदि कांग्रेस-आप का गठबंधन सोमवार तक परवान न भी चढ़ा तो नाम वापस लेने की अंतिम दिन तक कुछ भी हो सकता है।
कांग्रेस से माकन और चौहान कर रहे जनसंपर्क
कांग्रेस की और से तो मात्र अजय माकन नई दिल्ली सीट से प्रत्याशी होने का दावा करते हुए जनसंपर्क में लगे हैं। वहीं पूर्व मंत्री राजकुमार चौहान की सीट भी तय है यानी गठबंधन हुआ या नहीं उनकी सीट पक्की है। ऐसेे में उन्होंने भी चुनाव प्रचार शुरू कर दिया है। जबकि अन्य सीटों पर कांग्रेस ने चुप्पी साध रखी है।