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लॉकडाउन 4.0 : उद्योग क्षेत्र में कामगारों और कच्चे माल की कमी,  बाजार खुलने से उम्मीद जगी

Tue, 19 May 2020 09:49 PM IST
Mohit Mudgal अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
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सांकेतिक तस्वीर
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कोरोना संकट के बीच दिल्ली के इंडस्ट्रियल एरिया में उद्योग-धंधे शुरू होने लगे हैं। हालांकि, फैक्टरी मालिकों के सामने मजदूरों और कच्चे माल की कमी पेश आ रही है। चूंकि बाजार अभी खुले हैं और खरीदारी शुरू नहीं हुई है ऐसे में फैक्टरी मालिकों के पास आर्डर भी नहीं है। बादली, नरेला, झिलमिल, ओखला औद्योगिक क्षेत्र, समेत अन्य इलाकों में जरूरी और गैर जरूरी सामानों का निर्माण करने वाली फैक्ट्रियां शुरू हो गई हैं, जो पिछले करीब दो महीने से बंद थी। 

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लॉकडाउन 3.0 में उद्योग-धंधों को उचित चिकित्सकीय मानकों व अन्य दिशा निर्देश के साथ फैक्टरी खोलने की इजाजत दी गई थी, लेकिन खुदरा व थोक बाजार नहीं खुलने के कारण मांग ही नहीं थी। इसी तरह मजदूरों के पलायन करने की वजह से भी परेशानी है। हालांकि लॉकडाउन-4 में खुदरा व थोक बाजार खोलने के निर्देश पर अब फैक्टरी मालिकों की उम्मीदें बढ़ी हैं।  

भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश महामंत्री हेमंत गुप्ता के अनुसार दिल्ली केे बाजारों से प्रतिबंध हटने पर फैक्टरी वालों को आस बंधी है, लेकिन अन्य राज्यों से आने वाले व्यापारियों की कमी से उद्योगों को फिलहाल रफ्तार पकड़ने में समय लगेगा।  
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केंद्र सरकार ने 20 लाख करोड़ के आर्थिक राहत पैकेज में खुदरा, मध्यम व थोक व्यापारी को शामिल नहीं  किया है। व्यापारियों को आर्थिक मदद नहीं मिलने से निराशा है। बवाना औद्योगिक क्षेत्र के प्रधान राजेश गर्ग ने कहा कि सरकार को उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए आर्थिक सहयोग देने की जरूरत है। देशव्यापी लॉकडाउन के पहले दिन से ही राजधानी से श्रमिकों का अपने गृह राज्यों को जाना जारी है। कच्चे माल की कमी के चलते फैक्ट्रियां पूरी क्षमता से नहीं चल पा रही हैं।

वजीरपुर इंडस्ट्रीयल एरिया के व्यापारी देवराज बवेजा का कहना है कि खुदरा और थोक बाजार पर ही उद्योग धंधा निर्भर होता है। दिल्ली में बना माल हरियाणा, उतर प्रदेश, पंजाब, बिहार समेत कई राज्यों में जाता है। पुरानी दिल्ली में बड़ा होलसेल मार्केट है। फैक्टरी में बना सामान होलसेल मार्केट पहुंचता है फिर यहां से दिल्ली समेत अन्य राज्यों में भेजा जाता है। चूंकि लॉकडाउन अभी पूरे तरीके से खत्म नहीं हुआ है, लिहाजा फैक्टरी में उत्पादन ज्यादा होने की उम्मीद कम है। 

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