हवा में दीवार से चिपकने जैसा अनुभव कर रहे लोग
अमर उजाला ब्यूरो
पूर्वी दिल्ली। रामलीला के मेलों में इस बार लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है ‘मिक्सर झूला’। इसे लोग ‘छिपकली झूला’ और ‘ग्रेविटी झूला’ भी कह रहे हैं। इस झूले के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। झूले में बैठने वाले लोग इसके अंदर और बाहर से वीडियो बनाकर साझा कर रहे हैं। तेज रफ्तार में घूमते इस झूले में लोगों का शरीर पारदर्शी सतह से इस तरह चिपका दिखाई देता है, मानो वे हवा में टिके हों। यही नजारा लोगों को हैरान कर रहा है। इस झूले में लोग एक गोलाकार हिस्से के अंदर खड़े होते हैं। झूला तेजी से घूमना शुरू करता है तो लोगों का शरीर बाहरी सतह की ओर दबता है। घूमने के दौरान लगने वाले बल के कारण लोग कुछ समय तक सतह से टिके रहते हैं। बाहर से देखने पर ऐसा लगता है कि मानो लोग हवा में चिपक गए हों। इसी अनोखे अनुभव के कारण युवा और दूसरे दर्शक इसे आजमाने के लिए उत्साहित नजर आ रहे हैं।
क्या है इसके पीछे का विज्ञान?
झूले में दिखाई देने वाले इस नजारे के पीछे घूमने के दौरान लगने वाले बल के अपकेंद्रीय बल कहा जाता है। जब कोई वस्तु गोलाकार रास्ते पर तेजी से घूमती है, तो उसमें बाहर की ओर धकेले जाने जैसा प्रभाव महसूस होता है। इसी दौरान झूले की सतह शरीर को सहारा देती है और लोग उससे टिके दिखाई देते हैं। इसका एक आम उदाहरण वॉशिंग मशीन का स्पिन साइकल है। मशीन तेजी से घूमती है तो कपड़ों से पानी बाहर निकलता है। हालांकि, झूले में शरीर का सतह से टिके रहना केवल ‘जीरो ग्रैविटी’ का असर नहीं है, बल्कि घूमने की गति और सतह से मिलने वाले सहारे का परिणाम है।