अश्लील व द्विअर्थी गानों के लिए गायक नहीं बल्कि श्रोता जिम्मेदार हैं। क्योंकि यदि श्रोता ऐसे गानों को सुनने व आइटम सॉन्ग का बहिष्कार कर देंगे तो निर्माता-निर्देशक ऐसे गानों को फिल्मों में जगह ही नहीं देंगे।
जिस दिन दर्शक जलेबी जैसे गानों पर अपने घरों के कार्यक्रम में परिवार संग नाचना बंद कर देंगे, ऐसी शिकायतें ही नहीं होंगी। यह कहना है बॉलीवुड के मशहूर गायक सुरेश वाडेकर का।
वे बुधवार को दूरदर्शन द्वारा वर्ष 1965 में इंडो-पाक युद्ध की 50वीं वर्षगांठ पर स्मरणांजलि के माध्यम से अमर शहीदों को संगीतमय श्रद्धांजलि कार्यक्रम में प्रस्तुति देने की जानकारी दे रहे थे। सुरेश ने माना कि अब फिल्मों में गानों का स्तर बेहद गिर गया है। इसके चलते परिवार संग बैठकर फिल्म नहीं देखी जा सकती हैं।
वहीं, शास्त्रीय व बॉलीवुड गायिका कविता कृष्णमूर्ति का कहना था कि कई बार ऐसे अश्लील शब्दों से भरे गानों के चलते मैंने गाना गाने से मना भी किया है। क्योंकि जब वो गाने फिल्मों के माध्यम से मार्केट में आएंगे तो हमारे परिवार से जुड़े लोग सुनेंगे। परिवार के बीच ऐसे गानों में अपनी आवाज देने से बेहतर है कि गाया ही न जाए।
फरहान अख्तर ने बता दी दिल का बात
फिल्मों का निर्देशन करने के बाद अभिनय में अपना लोहा मनवा चुके फरहान अख्तर ने कहा, ‘अगर दोबारा भाग मिल्खा भाग जैसी फिल्म की स्क्रिप्ट मिली तो जरूर करेंगे।’ फरहान बुधवार को एक प्रमोशनल कार्यक्रम में दिल्ली आए थे। फिल्म निर्देशन करने पर उन्होंने कहा कि समय मिलते ही काम शुरू करेंगे।