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Delhi: अंतर विभागीय भूमि आवंटन के मसौदे को एलजी की मंजूरी, नहीं अटकेंगी परियोजनाएं, होगी एक समान नीति

Sun, 03 Mar 2024 02:57 PM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

यह नीति उपराज्यपाल की मंजूरी से तैयार की गई है और तत्काल प्रभाव से लागू होगी। 7 सदस्य वाली कमेटी ने इस नीति को तैयार किया है।
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वीके सक्सेना, उपराज्यपाल दिल्ली। - फोटो : social media
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विस्तार
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दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने अधीनस्थ विभागों, स्वायत्त निकाय, बोर्ड सहित अन्य विभागों में भूमि के अंतर-विभागीय आवंटन के मसौदे को मंजूरी दे दी। इसके तहत अब सभी जगहों पर एक समान नीति होगी। अब तक सरकारी भूमि के अंतर-विभागीय आवंटन से निपटने के लिए कोई समान नीति नहीं थी। इसके कारण महत्वपूर्ण परियोजनाएं सालों अटकी रहती हैं। साथ ही फाइलें विभागों के बीच ही घूमती रहती थीं। उपराज्यपाल की मंजूरी के साथ यह नीति तैयार की गई है जो तत्काल प्रभाव से लागू होगी।

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प्रकृति के आधार पर तय होगी दर
भूमि के आवंटन की प्रकृति के आधार पर दर तय की जाएगी। यदि आवंटन सार्वजनिक उपयोगिता के लिए है तो यह निशुल्क होगा। बशर्ते आवंटन एजेंसी को संबंधित भूमि निशुल्क मिली हो। ऐसे मामलों में जहां एजेंसी को कुछ लागत पर, यानी अधिग्रहण के माध्यम से, भूमि मिली है, इसके आवंटन के लिए यह दर, बिना लाभ-बिना हानि के आधार पर तय होगी। जहां भूमि को व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए भूमि स्वामित्व विभाग द्वारा दूसरे को आवंटित किया जाएगा। वहां पर आवंटन के लिए डीडीए के जोनल की भिन्न दरें लागू होंगी।

सात सदस्य समिति ने दिए इनपुट
अतिरिक्त मुख्य सचिव (जीएडी) की अध्यक्षता वाली सात सदस्यीय समिति ने कई दिनों के विचार-विमर्श के बाद यह नीति तैयार की है। समिति ने विभिन्न विभागों से प्राप्त सुझावों और इनपुट के आधार पर इस पर विचार-विमर्श किया था। इसमें भूमि एवं भवन विभाग, नीति के कार्यान्वयन के लिए नोडल विभाग होगा। भूमि स्वामित्व एजेंसी और आवंटन एजेंसी, आवंटन की प्रकृति पर पारस्परिक रूप से निर्णय लेंगी, चाहे आवंटन लीज होल्ड पर हो या फ्री होल्ड आदि के आधार पर होगा। इसमें भूमि आवंटन रद्द करने के लिए उपराज्यपाल की मंजूरी की आवश्यकता होगी।
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समिति करेगी लागत की जांच
प्रधान सचिव (राजस्व) की अध्यक्षता में एक समिति बनेगी। इसमें भूमि अधिग्रहण एजेंसी, भूमि स्वामित्व वाली एजेंसी और संबंधित जिला मजिस्ट्रेट इसके सदस्य के रूप में शामिल होंगे। समिति भूमि आवंटन के अनुरोध के साथ साथ मानदंडों के आधार पर विकास, उपयोगिता और परियोजना की लागत आदि की जांच करेगी। समिति को विचार और अंतिम निर्णय के लिए मुख्य सचिव के माध्यम से उपराज्यपाल के समक्ष अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करनी होंगी।

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