उपराज्यपाल की सलाह है कि दस लाख उपभोक्ताओं के बिल, जुर्माना और बकाया माफ करने जैसी किसी बात पर विचार किया जा रहा है तो शेष 17 लाख उपभोक्ताओं, जिन्होंने इतने वर्षों में बिलों का भुगतान किया है, उन्हें भी ब्याज सहित राशि वापस की जाए। उपराज्यपाल ने पत्र में कहा है कि मुख्यमंत्री को बस योजना को रोकने के दावे, सफेद झूठ और दोषारोपण करना है। इसी तरह की वे राजनीति करते हैं। 17 लाख उपभोक्ताओं ने 2012 से जल बोर्ड को बिल के रूप में 13,186 करोड़ रुपये का भुगतान किया।
इन उपभोक्ताओं को ब्याज सहित राशि लौटाएं। दिल्ली विधानसभा ने 19 फरवरी को प्रस्ताव पारित किया कि भाजपा का उपराज्यपाल पर सीधा नियंत्रण है। इससे साबित होता है कि दिल्ली सरकार अभी भी फाइलों को इधर-उधर घुमा ही रही थी। इस बीच एक असंवैधानिक प्रस्ताव पारित कर दिया। इससे कोई भी यह सोचने पर मजबूर हो सकता है कि मंत्री एक वर्ष से भी अधिक समय तक प्रस्तावित योजना को लेकर क्यों बैठे रहे। वे खुद पार्टी के सदस्यों को गुमराह भी कर रहे हैं।