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'केजरीवाल सरकार के दबाव में आए थे एलजी'

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आम आदमी पार्टी (आप) ने पहले से ही तय कर लिया था कि तीनों बिजली कंपनियों के खातों का ऑडिट करवाया जाएगा।
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सरकार बनते ही आप ने चुनावी वायदे को पूरा करने के लिए खातों का ऑडिट करवाने को वैधानिक और संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन किया। टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (टीपीडीडीएल) ने हाईकोर्ट के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए यह आरोप लगाया।

मुख्य न्यायाधीश जी. रोहिणी और न्यायमूर्ति आरए एंडलॉ की खंडपीठ के समक्ष मंगलवार को पेश खातों की जांच के संबंध में दिल्ली सरकार के आदेश को चुनौती दी गई याचिका पर टीपीडीडीएल के अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने अपना पक्ष रखा।
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केजरी सरकार के दबाव में थे उपराज्यपाल

उन्होंने कहा कि जब एक विशेष पार्टी अपने चुनावी घोषणा पत्र में यह निर्णय करती है कि वह बिजली की दरों में कटौती करेगी और बिजली कंपनी के खातों का नियंत्रक महालेखा परीक्षक (सीएजी) से ऑडिट करवाएगी तो वह वैधानिक और संवैधानिक प्रावधानों का पालन नहीं कर सकती।

उपराज्यपाल किसी भी प्रकार से राज्य सरकार की सहायता और सलाह से काम करने के लिए बाध्य नहीं थे। उन्हें अपने विवेक का इस्तेमाल कर निर्णय लेना चाहिए था।

वहीं दिल्ली सरकार ने कहा था कि कंपनियों में पब्लिक का धन लगा है और इसी आधार पर ऑडिट जरूरी है।
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11 अगस्त को है अगली सुनवाई

खंडपीठ टीपीडीडीएल के अलावा बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड, बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड की ओर से सरकार द्वारा उनके खातों का ऑडिट करवाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही है।

वहीं एनजीओ यूनाइटेड आरडब्ल्यूए संयुक्त एक्शन कमेटी ने कंपनियों के खातों की जांच करवाने की मांग को लेकर जनहित याचिका दायर की हुई है। खंडपीठ ने अब 11 अगस्त को सुनवाई तय की है।
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