उपराज्यपाल नजीब जंग ने अधिकारियों को बुधवार छोड़कर बाकी दिन दो घंटे जनता से मिलने और समस्या सुलझाने के निर्देश दिए हैं।
सुबह 11 बजे से दोपहर एक बजे तक प्रधान सचिव, सचिव, आयुक्त या विभाग के प्रमुखों के साथ ही नीचे के अधिकारी भी पब्लिक के लिए दरवाजा खोलकर रखेंगे।
अरविंद केजरीवाल सरकार के रहते भी अधिकारियों को इस तरह के निर्देश जारी हुए थे, लेकिन राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद से व्यवस्था चौपट हो गई थी। उपराज्यपाल ने निर्देश दिए हैं कि सुबह 11 से एक बजे के बीच अधिकारी कोई मीटिंग नहीं रखेंगे। विभाग जो भी फैसले लें या नए नियम बनाएं, उसे जनता तक पहुंचाएं।
जनता तक पहुंचेगी हर रिपोर्ट
इसके लिए हर विभाग के दिन निर्धारित किए गए हैं। फैसलों की जानकारी और जनता की सुनवाई के लिए बैठक की तारीख तय करके उपराज्यपाल कार्यालय को सूचना प्रति देने के निर्देश भी दिए गए हैं।
विभागों से कहा गया है कि वे सभी सूचनाएं और फैसलों की जानकारी सूचना एवं प्रचार निदेशालय को देंगे, जिससे मीडिया के माध्यम से जनता तक पहुंचाया जा सके।
मुख्य सचिव एसके श्रीवास्तव ने इस संदर्भ में सर्कुलर जारी कर दिल्ली जलबोर्ड, तीनों एमसीडी, एनडीएमसी के अलावा दिल्ली सरकार के सभी विभाग प्रमुखों को उपराज्यपाल के निर्देश का सख्ती से पालन करने को कहा है।
यहां भी लागू होगा AAP सरकार का फैसला
उपराज्यपाल के निर्देश पर उत्तरी और दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के आयुक्त ने जनता दरबार लगाने का फैसला किया है। वह तमाम वरिष्ठ अधिकारियों के साथ जनता की शिकायतें सुनेंगे। उत्तरी दिल्ली नगर निगम के आयुक्त पीके गुप्ता ने जनता दरबार लगाने के लिए सभी वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं।
सभी अतिरिक्त आयुक्त और विभागों के प्रमुख प्रतिदिन अपने कार्यालय में सुबह 10 से 11 बजे तक जनता की शिकायतें सुनेंगे, जबकि आयुक्त दोपहर 12 से एक बजे के बीच जनता से रूबरू होंगे। आयुक्त की गैरमौजूदगी में उनसे नीचे के अधिकारी जनता की शिकायतें सुनेंगे।
दूसरी ओर दक्षिण दिल्ली नगर निगम के आयुक्त मनीष गुप्ता ने भी शिकायतें सुनने का फैसला किया है। मुख्यालय में आयुक्त, सभी अतिरिक्त आयुक्त और सभी विभागों के प्रमुख प्रत्येक बुधवार को शिकायतें सुनेंगे, जबकि सभी चारों जोन के उपायुक्त प्रत्येक सोमवार, मंगलवार और बृहस्पतिवार को आम लोगों से मिलेंगे।