गौतमबुद्धनगर लोकसभा के चुनाव में भाजपा ने बाजी क्या मारी, अन्य दलों में उथल-पुथल मची हुई है।
हारने वाले राजनीतिक दलों के नेता दूसरों को दोषी मान रहे हैं, स्वयं जिम्मेदारी लेने को कोई तैयार नहीं हैं। बताया जाता है कि अब स्थानीय स्तर पर संगठन में शीघ्र बदलाव देखने को मिलेंगे।
सूत्र बताते हैं कि सपा और बसपा में हाईकमान स्तर पर बैठकों का सिलसिला जारी है। जिससे भी हाईकमान ने यह पूछा कि ऐसा क्यों हुआ तो ज्यादातर ने जवाब दिया कि मोदी लहर में युवक बहक गए और उन्होंने इकतरफा भाजपा को वोट दे दिया। यहां तक कि हर दल के युवाओं ने अपने परिजनों की बात नहीं मानी।
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इसके अलावा यह बात भी सामने आई है कि प्रत्याशी की तरफ से भी कहीं न कहीं ढिलाई बरती गई है। कार्यकर्ताओं की बात न मानकर किसी ऐसे पर विश्वास किया गया जिसका पार्टी से कोई लेना देना नहीं था।
घर से यह कहकर निकलते थे वोट मांगने जा रहे हैं लेकिन वह कहीं जाकर सो जाते थे। गाड़ी और पैसा लेकर भी जाते थे, उसका कोई प्रयोग नहीं हो सका।
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पार्टी हाईकमान को यह बात भी पहुंचा दी गई कि पार्टी की खूबियों और उपलब्धियों पर चर्चा न करके खुद के बारे में ज्यादा बखान किया गया। वोट मांगने के वक्त नम्र व्यवहार नहीं किया गया, जिससे वोटर नाराज रहा और सबक सिखाने के तौर पर पार्टी की करारी हार हुई है।
सूत्र बताते हैं कि एक नेता से जब उसकी पार्टी हाईकमान ने पूछा कि लोकसभा चुनाव में करारी हार के पीछे क्या कारण रहा तो उसने तर्क दिया कि लोकसभा का चुनाव केंद्रीय नीतियों के तहत होता है लेकिन जब अगला विधान सभा का चुनाव होगा तो लोग प्रदेश सरकार की नीतियों के हिसाब से वोट डालते हैं। इस बात पर नेताजी को फटकार भी लगी।