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कनावनी कांड: दहशत और खौफ बयां करती हैं ये 9 बातें

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बीते सोमवार को नोएडा के बनावनी गांव में जमीन के लिए हुए खूनी संघर्ष का मातम अभी तक जारी है।
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एक ओर जहां दलितों के घर उजाड़े जा रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर उस इलाके में दलितों के घर में किराए पर रहने वाले लोगों को भी नहीं बख्शा जा रहा है।

संघर्ष में एक पक्ष के युवक की मौत होने के बाद बवाल और बढ़ गया। पुलिस की मौजूदगी के बावजूद पिछले एक सप्ताह से पूरे इलाके में खौफ और दहशत का माहौल बरकरार है।

घर तो छूटा ही नौकरी भी गई

दबंगों के डर से कनावनी गांव में पलायन का दौर जारी है। दलितों के घरों में रहने वाले किराएदारों पर दबाव डाल कर उन्हें पलायन के लिए मजबूर किया जा रहा है।

वहीं, कई बिल्डरों के यहां काम करने वाले गार्ड और ड्राइवर जो दलितों के घरों में किराएदार हैं, उन्हें घर छोड़कर जाना पड़ रहा है और नौकरी से भी हाथ धोना पड़ रहा है।

गांव में दलितों के घरों में रहने वाले किराएदारों का पलायन रोकने में पुलिस और प्रशासन भी असहाय बना हुआ है। वहीं, दलितों के घरों और दुकानों को चला रहे कई और किराएदार अपना सामान बांधने की तैयारी कर रहे हैं।

'यहां रहना खतरे से खाली नहीं'

एक बिल्डर सोसाइटी में गार्ड के रूप में तैनात मूलरूप से गढ़वाल के रहने वाले सोम सिंह कनावनी में एक दलित के मकान में किराएदार हैं।

उन्होंने बताया कि एक बार इतनी बड़ी घटना होने के बाद अब यहां पर स्वयं या परिवार का रहना खतरे से खाली नहीं है। इसलिए यहां से जा रहे हैं।

पास के एक घर से अपना सामान बांध रहे किराएदार ने अपना नाम न बताते हुए कहा कि उन्हें पूर्व में ही धमकी मिल चुकी थी कि मकान खाली न किया तो कोई बड़ी घटना घट सकती है।

बच्चा बीमार है लेकिन बाहर निकलना मुश्किल

दलितों के घरों में किराए पर रहने वाली निशा ने बताया कि मेरा तो एक महीने का बच्चा है। रविवार को उसको पीलिया हुआ था। जिसे लेडी हार्डिंग अस्पताल में एक दिन के लिए भर्ती कराया था।

सोमवार को झगड़े के बाद दहशत के कारण दोबारा चेकअप के लिए नहीं जा पा रहे हैं। आज भी बच्चा काफी बीमार लग रहा है।

शनिवार को दलितों के घरों से पलायन कर रहे किराएदारों से पुलिस ने जानकारी ली तो किराएदारों का कहना था कि ‘जान है तो जहान है।’ हालांकि किसी किराएदार ने पुलिस से शिकायत नहीं की, लेकिन उनका गांव छोड़ कर जाना बदस्तूर जारी है।

‘चार दिन में शादी है, पर यहां कौन आएगा’

दलित के यहां किराए से रहने वाले एक परिवार की लड़की का विवाह सात मई को होना है, लेकिन परिजनों को डर है कि दहशत के चलते यहां कोई रिश्तेदार नहीं आएगा। मजबूरी में वो गाजियाबाद शिफ्ट हो रहे हैं।

घरों में तोड़फोड़ के बाद किराएदारों को भी घर खाली करने का अल्टीमेटम दिया गया है। लिहाजा, अब घर खाली करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा। लड़की की मां कहती है कि शादी की तैयारियां धरी की धरी रह गई हैं। चार दिन बचे हैं और घर बदलना पड़ रहा है.. मजबूर हैं, क्या करें।

यहां शादी करेंगे तो रिश्तेदार भी नहीं आएंगे और इन हालात में जोखिम कौन ले? उन्होंने कहा कि लड़की के पिता बीमार हैं और हजारों काम होने बाकी हैं।

...सूनी मांग और आंसुओं के निशान

उसकी मांग सूनी है और चेहरे पर आंसुओं के निशान हैं। खाने का होश है न सोने की सुध... वो दिनभर पति की तस्वीर के सामने रोती रहती है। सवा दो महीने पहले कसाना परिवार में सुहागन बनकर आई 19 साल की एक लड़की के सपने कनावनी कांड में चली गोलियों के धमाकों में उजड़ गए।

परिजन बताते हैं कि राहुल की बेवा दिनरात बेसुध रहती है। उसका आज बिखरा हुआ है और कल संवरने का कोई भरोसा नहीं। अकेली वही नहीं है... और भी औरतें हैं। घर की बहू को तो समझाती हैं, पर खुद के आंसू भी नहीं रोके जाते।

23 साल का जवान लड़का चला गया। गम में रोते-रोते कब सांसें उखड़ने लगती हैं.. पता ही नहीं चलता। आंख अस्पताल में खुलती है। राहुल के चचेरे भाई संतराम ने कहा कि स्कूल न उन्होंने ढहाया और न उनके घरवालों ने। वो कहते हैं कि कुछ लोग हैं, जो कसाना परिवार के नाम पर दहशत फैला रहे हैं, पुलिस भी जानती है।

अभी भी फरार हैं 16 आरोपी

संतराम के मुताबिक राहुल के नामजद हत्यारों को पुलिस अब तक गिरफ्तार नहीं कर सकी है। घटना के दिन पकड़े गए तीन आरोपी ही जेल में हैं, बाकी सोलह अब भी बाहर हैं।

उनकी गिरफ्तारी की मांग कई बार पुलिस अधिकारियों से कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि जिस जमीन पर स्कूल बना था, वह सरकारी है और मुकदमा चल रहा था।

अदालत ने उसे तोड़ने के आदेश दिए थे। पैरवी करने के चलते ही दूसरे पक्ष ने रंजिश ठान ली और सत्तर गज के प्लॉट का विवाद खड़ा कर दिया।

'जिसका बेटा मारा गया वही गुनहगार'

कनावनी गांव का दौरा करने के बाद पेश की गई राज्य एससी-एसटी आयोग की रिपोर्ट को मृतक राहुल कसाना के परिवार ने गलत बताया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि राहुल कसाना की मौत गलती से गोली चलने की वजह से हुई है।

परिजनों का कहना है कि दूसरे पक्ष ने ही राहुल कसाना की जान ली है। इंदर कसाना ने आयोग की रिपोर्ट का खंडन करते हुए कहा कि हमारा ही बेटा मारा गया है और हमें ही गुनहगार ठहराया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि रविवार को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष पीएल पुनिया के कनावनी गांव आने पर इस रिपोर्ट की शिकायत की जाएगी। गौरतलब है कि 30 मई को राज्य एससी-एसटी आयोग की सदस्य किरन आरसी जाटव कनावनी गांव पहुंची थीं। उन्होंने दोनों पक्षों से मुलाकात कर एक रिपोर्ट प्रदेश के मुख्यमंत्री के सामने रखी है।
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नेताओं के दौरे भी जारी

भाजपा और सपा नेता शनिवार को कनावनी पहुंचे और इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। राजनेताओं ने मृतक के परिजनों से मुलाकात की और शोक व्यक्त किया।

पिछले कुछ दिनों से चल रहे घटनाक्रम के बाद भाजपा नेता नवाब सिंह नागर, ब्रिजेंद्र नागर और सपा नेता नरेंद्र सिंह भाटी, राजकुमार भाटी, फकीरचंद नागर, सूबे यादव समेत अन्य नेता राहुल कसाना के घर शोक व्यक्त करने पहुंचे। इस दौरान दोनों पार्टियों के नेताओं ने सभी वर्गों से शांति की अपील की।

इसके बाद भाजपा नेता डूब क्षेत्र में दबंगों द्वारा तोड़े गए सिद्धार्थ पब्लिक स्कूल को देखने पहुंचे। भाजपा नेताओं ने सरकार से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। वहीं, यह भी कहा कि जिन दलितों का नुकसान हुआ है उसकी भरपाई भी की जाए।
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