फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

...तो इसलिए गुड़गांव नहीं बन पाएगा ग्लोबल सिटी!

Fri, 07 Feb 2014 05:25 PM IST
यशलोक सिंह/ अमर उजाला, गुड़गांव
विज्ञापन
विज्ञापन
गुड़गांव में विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज) के लिए अधिग्रहीत जमीन को लेकर हरियाणा सरकार के निर्णय से प्रभावित किसानों में आक्रोश है।
विज्ञापन


उनका कहना है कि उन्हें ग्लोबल सिटी नहीं अपनी जमीन चाहिए। सरकार को अगर यह सिटी बसानी है तो उसने लिए जमीन की व्यवस्था कहीं और से कर ले।

क्योंकि उन्होंने जमीन एसईजेड के लिए दिया था। जब यह प्रोजेक्ट ही खत्म हो गया तो जमीन उनको वापस मिलना चाहिए। गुड़गांव के पांच गांवों की 1600 एकड़ से अधिक जमीन प्रदेश सरकार ने वर्ष 2003-04 में एक्वायर की थी।

अधिग्रहण का यह काम एचएसआईआईडीसी ने ओम प्रकाश चौटाला के मुख्यमंत्रित्व काल में किया था। वर्ष 2005-06 में भूपेन्द्र सिंह सरकार ने किसानों को प्रति एकड़ 12 लाख रुपये का मुआवजा दिया था। जो कि मार्केट रेट से काफी कम था।
विज्ञापन


राष्ट्रीय किसान महासंघ के राष्ट्रीय प्रवक्ता महेन्द्र शास्त्री ने बताया कि बाद में सरकार ने आठ लाख प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजे की रकम बढ़ाई इसके बाद भी काफी कम है। आज इन जमीनों की कीमत प्रति एकड़ 10 करोड़ रुपये से अधिक है।

राष्ट्रीय किसान महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक सूरजमल ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के साथ छल कर रही है। उन्होंने कहा कि जिस उद्देश्य के लिए जमीन का अधिग्रहण हुआ है अगर वह पूरा नहीं होता तो उसे उसके मालिकों को लौटा देना चाहिए। यह टिप्पणी अदालत की है। ऐसे में हरियाणा सरकार का यह निर्णय अवैधानिक है।

अगर सरकार ग्लोबल सिटी के लिए जमीन लेती है तो इसके खिलाफ किसान व्यापक आंदोलन के लिए मजबूर हो जाएंगे। गाड़ौली के किसान सतपाल सिंह और मोहम्मदपुर के सरपंच नत्थू सिंह ने कहा कि उन्हें उनकी जमीन चाहिए।
विज्ञापन


यह गांव प्रभावित
-गाडौली खुर्द की 700 एकड़
-हरसरू की 700 एकड़
-मोहम्मदपुर की 200 एकड़
-नरसिंहपुर सात एकड़
-खांडसा 20 एकड़

राष्ट्रीय किसान महासंघ की बैठक जल्द
राष्ट्रीय किसान महासंघ के राष्ट्रीय प्रवक्ता महेन्द्र शास्त्री ने कहा कि जल्द ही पांच गांवों के तकरीबन 800 किसानों के साथ बैठक कर भविष्य की रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रथम दृष्टया कैबिनेट के निर्णय से किसान मायूस हैं। उन्हें किसी भी कीमत पर जमीन वापस चाहिए।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें