अगर आपके अंदर आगे बढ़ने का जुनून है तो विषम परिस्थितियां भी आपके अनुकूल होती चली जाती हैं। ऐसी ही परिस्थितियां फरीदाबाद की महिला क्रिकेटर रजावती के सामने भी आईं थीं। लेकिन उसने आर्थिक बाधाओं से लड़ते हुए राज्य स्तर पर अच्छा मुकाम हासिल किया।
नहरपार स्थित पल्ला के तरुण निकेतन स्कूल में क्रिकेट अकादमी चलाने वाले कोच संजय बताते है कि वर्ष 2009 में फरीदाबाद की महिला क्रिकेट टीम बनाने के लिए वह और सीनियर कोच राजकुमार सराय ख्वाजा स्थित सरकारी स्कूल में ट्रायल लेने गए।
वहां पर उन्होंने रजावती को स्पिन गेंद करते हुए देखा। उन्होंने ट्रायल के बाद रजावती से टीम में शामिल होने के बारे में पूछा तो उसने जवाब दिया कि वह टीम में तो शामिल हो जाएगी, लेकिन उसके पास ड्रेस खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं।
रजावती की बात सुन संजय ने न केवल उसे फरीदाबाद की टीम में शामिल किया, बल्कि अपनी अकादमी में फ्री कोचिंग भी देने लगे। वही रजावती तीन साल से लगातार हरियाणा की स्टेट महिला क्रिकेट टीम की हिस्सा है।
उसे अपने खेल के बल पर स्पोर्ट्स कोटे के तहत दिल्ली के कमला नेहरू कॉलेज में दाखिला मिला। रजावती फरवरी में दिल्ली यूनिवर्सिटी की तरफ से यूनिवर्सिटी जोनल प्रतियोगिता में शिरकत करेगी।
मां मटके बेचती है और पिता हैं ड्राइवर
सेहतपुर स्थित भट्टा कॉलोनी में रहने वाला रजावती का परिवार आर्थिक रूप से संघर्ष कर रहा है। रजावती की मां जहां परिवार के गुजारे के लिए मटके बेचनी हैं, वहीं पिता पतराम किराये पर गाड़ी चलाते हैं। पतराम बताते हैं कि उन्हें अपनी बेटी पर गर्व है। क्योंकि उसने हर जगह उनका सिर ऊंचा रखा है, सम्मान दिलाया है।