मेरी उम्र पर न जाओ मेरा हौसला देखो, किसी शायर की कही गई ये पंक्तियां 10 साल के निश्चय जैन पर सटीक बैठती हैं।
अपनी पॉकेटमनी में से एक गरीब बच्चे की स्कूल फीस भरने वाले निश्चय को पता भी नहीं है कि वह कितना बड़ा काम कर रहा है। वह बड़ी मासूमियत से बताता है कि उसे तो यह सब करके अच्छा लगता है।
डीपीएस इंदिरापुरम में चौथी का छात्र निश्चय जैन कौशांबी स्थित शिप्रा कृष्णा एज्योर में रहता है। निश्चय ने बताया कि एक दिन अपने बच्चे की फीस भरने के लिए कामवाली ने उसकी मम्मा से पैसे मांगे। लेकिन रोज-रोज पैसे मांगने की बात कहकर उसकी मम्मा ने कामवाली को डांट दिया।
उसी दौरान उसने कामवाली के बच्चे की स्कूल फीस अपनी पॉकेटमनी से भरने का फैसला कर लिया। भोवापुर निवासी कामवाली के बेटे कृष्णा का अप्रैल में कौशांबी कॉन्वेंट स्कूल में दाखिला कराया गया।
निश्चयकी पॉकेटमनी में से ही कृष्णा की पढ़ाई का खर्च चल रहा है। वह कहता है कि पता नहीं उसके दोस्त क्या कहेंगे तो उसने इसके बारे में दोस्तों को भी नहीं बताया।