बृहस्पतिवार को पुलिस ने थाना ईकोटेक-1 क्षेत्र में एमडीएमए ड्रग्स बनाने की फैक्टरी का खुलासा किया। साथ ही यहां से नाइजीरिया के नागरिक जॅनबॉस्को, इनेनुएल, चिडी और ऑन्यौकैची फ्रैंक को गिरफ्तार किया था। इनके पास से 26.7 किलो ड्रग्स बरामद की गई थी। इसके साथ ही कच्चा माल भी मिला था।
ड्रग्स के धंधे के पुराने पकड़े गए आरोपियों से भी संपर्क
पुलिस जांच में सामने आया है कि ओमिक्रान-1 क्षेत्र में ही पिछले एक वर्ष में पकड़े गए ड्रग्स के दो अन्य मामलों के आरोपियों से भी इन चारों नाईजीरियाई नागरिकों का संपर्क है। माना जा रहा है कि सभी मामलों में दिल्ली में बैठा सरगना इन लोगों के संपर्क में था। मथुरापुर में ड्रग्स की फैक्टरी लगाने की वजह भी यही है कि यहां पर नाइजीरियाई नागरिक पहले भी अपना सेट अप बना चुके थे।
अफगानिस्तान और अफ्रीका में सप्लाई के सुराग मिले
पुलिस को जांच में संकेत मिल रहे हैं कि बंडल में ड्रग्स को दिल्ली के आईएनए मार्केट के पास एक खास जगह पहुंचा दिया जाता था। यहां से दिल्ली का आदमी माल ले लिया करता था। यहां से ड्रग्स के अफगानिस्तान और अफ्रीका में सप्लाई के सुराग मिले हैं। देश के अंदर भी कपड़ों के बंडल मुंबई और कोलकाता माल भेजने के बिल मिले हैं। इससे पुलिस मान रही है कि मुंबई और कोलकाता कपड़े के बंडलों में माल भेजा गया होगा। इसके अलावा अन्य शहरों में भी ट्रेन और बसों से माल भेजा जाता होगा।
किराएदारों के सत्यापन का अभियान चलेगा
ओमिक्रान-1 में ड्रग्स फैक्टरी के पकड़े जाने के बाद एक बार फिर ग्रेटर नोएडा में रह रहे लाखों किराएदारों और उनकी पहचान को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पुलिस अधिकारियों ने तय किया है कि सभी थाना क्षेत्रों में किराएदारों का सत्यापन किया जाएगा। मकान मालिक को यह जानकारी देनी होगी कि उसके यहां पर कितने और कहां-कहां के किराएदार रह रहे हैं।
नाईजीरियन भाषा के जानकार की मदद ले रही
ओमिक्रान-1 के मथुरापुर में ड्रग्स फैक्टरी पर छापा मारने के बाद पुलिस को मोबाइल और दस्तावेज मिले हैं उनमें नाइजीरियाई भाषा का इस्तेमाल किया गया है। पुलिस ने इन दस्तावेजों के विवरण को अच्छी तरह से जानने के लिए नाइजीरियाई भाषा के जानकार की भी मदद ली है।
चारों नाइजीरियाई नागरिकों से जो दस्तावेज, मोबाइल फोन आदि मिला है उसके आधार पर हम ड्रग्स के गैंग से जुड़े लोगों के वारे में और जानकारी जुटा रहे हैं। कुछ अहम सुराग मिले हैं जिनसे जांच में मदद मिली है। - साद मियां खान, डीसीपी