आईआईटी के छात्र ने किडनी की जांच के लिए बेहतरीन व सस्ती किट ईजाद की है, जिसका खर्च सिर्फ दो रुपये होगा। प्रेगनेंसी किट की तर्ज पर किडनी की जांच के लिए गोल्ड नैनो पार्टिकल से तैयार इस किट में किसी भी समय सिर्फ दो बूंद मूत्र की डालनी होंगी और उसका रंग बता देगा कि वायोमारकर प्रोटीन कितना है। उसी के आधार पर पता लग जाएगा कि किडनी कितनी खराब है।
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सेंटर फॉर बायोमेडिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर हरपाल सिंह और प्रोफेसर टीजी श्रीवास्तव की अध्यक्षता में पीएचडी स्कॉलर दिनेश कुमार ने इस किट को तैयार किया है। दिनेश के मुताबिक, मेरे पिता को किडनी की बीमारी थी। डॉक्टरों के काफी चक्कर काटने पड़ते थे, इसलिए ही इस किट को बनाने का आइडिया आया कि शुरुआत में ही जांच से ही किडनी का रोगी बनने से बचा जा सकता है।
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दिल्ली के कई सरकारी अस्पतालों में किट का ट्रायल सफल रहा है। इसी के आधार पर इसके पेटेंट के लिए आवेदन कर दिया गया है। गोल्ड नैनो पार्टिकल से तैयार यह किट देखने व प्रयोग करने में प्रेगनेंसी किट की तरह है। किट में जैसे ही मूत्र की बूंद गिरेंगी, तो यह गुलाबी रंग में डार्क से लेकर लाइट होगा। लाइट मतलब कम दिक्कत और डार्क मतलब अधिक। इसके साथ ही अब कैंसर को शुरुआती दिनों में जांचने के लिए भी तकनीक बनाने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
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270 तकनीक को प्रदर्शित किया
आईआईटी दिल्ली में शनिवार को इंडस्ट्री-डे का आयोजन किया गया। इसका उद्घाटन आईआईटी दिल्ली के डायरेक्टर प्रो. रामगोपाल राव ने किया, जबकि नीति आयोग के सदस्य व जेएनयू के चांसलर प्रो. वीके सारस्वत विशेष रूप से मौजूद रहे। प्रो. रामगोपाल ने कहा कि इंडस्ट्री-डे पर आम लोगों को बेहतर व सस्ती सुविधा देने के लिए तकनीक ईजाद की गई है। इसके अलावा इंडस्ट्री भी अपनी मांग के आधार पर तकनीक ईजाद करवा सकती है। डिफेंस, एनवायरमेंट, स्मार्ट सिटी, एफोरडेबल हेल्थ केयर व एनर्जी विषयों पर 270 तकनीक को प्रदर्शित किया गया।
टाइफाइड टेस्ट की रिपोर्ट पांच घंटे में
आईआईटी के विशेषज्ञों ने टाइफाइड टेस्ट की रिपोर्ट महज पांच घंटे में उपलब्ध करवाने के लिए रैपिड डायग्नोस्टिक किट फॉर ग्राम पॉजिटिव और नेगेटिव तकनीक बनाई है। इस तकनीक को तैयार करने के लिए गोल्ड नैनो पार्टिकल सॉल्यूशन का प्रयोग किया गया है। रिशर कुमार व मनु ने बताया कि इस तकनीक को आईएमसीटू डिवाइस नाम दिया गया है। सामान्य तौर पर लैब में इस जांच के लिए 20-40 एमएल रक्त निकाला जाता है, लेकिन इस जांच में सिर्फ एक एमएल बूंद ही प्रयोग होगी। पेटेंट के लिए आवेदन कर दिया गया है। कई अस्पतालों में इसका ट्रायल सफल रहा है। लैब में पांच सौ रुपये से अधिक शुल्क लगता है, लेकिन यह पूरी किट ही दो सौ से चार सौ रुपये के बीच होगी।