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खुली आंखों से 'मौत' को देखा, फोटो भी लाए

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दिल्ली से तीन लोग खुशी-खुशी 10 जून को दिल्ली से इमाम हुसैन की जियारत के लिए निकले थे लेकिन नजफ एयरपोर्ट से बाहर निकलने से लेकर कर्बला तक आठ-दस घंटे के सफर में कभी न भूलने वाली खौफनाक यादें जेहन में रह गईं।
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आतंक की ऐसी दास्तां कभी फिल्मों में भी नहीं देखी थी, जैसी सड़कों पर दिखी। सड़कों पर आतंकी ऐसे घूम रहे थे, जैसे हथियारबंद सैन्यकर्मी हों। बुर्का पहन कर आतंकी पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को अपना निशाना बना रहे थे।

जैद अहमद ने कहा कि उन्होंने और उनके साथियों ने आठ दिनों तक दहशत का ऐसा मंजर पहले कभी नहीं देखा सुना था। इसी खौफ के चलते 15 दिन का टूर रद्द कर 18 जून को ही वापस लौट आए।
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छोटी सी दूरी के लिए बदलनी पड़ी दस गाड़ियां

दिल्ली के शाहीन बाग निवासी जेड अहमद, अकबर और सुखदेव विहार निवासी आमिर छह दिन की कड़वी यादें लेकर हिंदुस्तान लौटे हैं। जेड शिया-सुन्नी फ्रंट दिल्ली के महासचिव भी हैं।

उन्होंने बताया कि वह दस जून को दिल्ली से नजफ एयरपोर्ट पहुंचे थे। एयरपोर्ट से बाहर निकले तो लगभग 150 का जत्था जियारत के लिए अलग-अलग गाड़ियों से रवाना हुआ।

अभी चंद किलोमीटर ही चले थे कि अचानक आरबी (सुरक्षा दस्ता) ने रास्ते में गाड़ी रोक ली। जांच के बाद दूसरी गाड़ियों से आगे भेजा गया। हर चार से पांच किलोमीटर के बाद गाड़ियां बदलते रहे और दो घंटे के सफर में दस वाहन बदले।

कार की सीट के नीचे झुककर बचाई जान

मौत के मुंह से लौटे जैद बताते हैं कि हमें बिल्कुल भी इल्म नहीं था कि यहां (इराक) में कुछ गड़बड़ है। लगभग दो घंटे के बाद हमने आतंक का खूनी खेल सड़कों पर देखना शुरू कर दिया।

इसी बीच कर्बला में हमाम हुसैन के जियारत स्थल पहुंचे। अभी जियारत कर ही रहे थे कि अफरा-तफरी मच गई।

पता चला कि कर्बला में लगभग दो किलोमीटर दूर कहीं आतंकियों ने ब्लास्ट किया है। इसी बीच मानव बम के पकड़ने समेत फायरिंग लगातार हो रही थी।

अकबर ने खींची ये फोटो

आमिर के अनुसार, ‘तीन दिन बचते बचाते कर्बला से हम मोसुल की तरफ निकले, लेकिन तभी सड़कों पर आतंकियों से सामना हो गया। हम कार की सीट के नीचे झुक गए और उन्हें पता नहीं चला।

क्योंकि वे दूसरी ओर गोलियां बरसाने हुए आगे निकल गए। इस घटना ने दिल को झकझोर दिया और हमने वापस लौटने का फैसला लिया।’ नोएडा एमिटी से कॉरपोरेट लॉ के छात्र अकबर ने बताया, ‘मोसुल से नजफ की ओर लौट रहे थे।

तभी देखा कि आरबी की गाड़ी में तीन आतंकियों को पकड़कर ले जाया जा रहा है। हमारी और उनकी गाड़ी आमने-सामने से गुजरी। इसी बीच मैंने अपने मोबाइल से फोटो खींच लिया, जिसमें तीन आंतकी बुर्के पहनकर बैठे हुए हैं।’
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करीब 150 लोग अब भी अटके

आमिर के मुताबिक, अभी लगभग 150 यात्री कर्बला और नजफ में अटके पड़े हैं। जब वे एयरपोर्ट से निकले थे तब आमना-सामना हुआ था और बातचीत से पता चला था कि वे सभी लखनऊ, मेरठ, दिल्ली, अमरोहा आदि शहरों से हैं।

आजमगढ़ निवासी गुलजार का भाई मोइम्मद जावेद बेहतर भविष्य की चाह में इराक गया था। गुलजार के मुताबिक, ‘कर्जा लेकर हमने भाई को भेजा था, लेकिन वहां खराब हालात के बाद उससे फोन पर संपर्क किया तो पता चला कि वह बेहद डरा हुआ है।

हमने उसे वापस आने की गुहार लगाई, लेकिन उसके पास पासपोर्ट ही नहीं है। क्योंकि इराक में कामकाजी नियमों के मुताबिक, बाहर से आने वाले कर्मियों का पासपोर्ट छीन लिया जाता है और कंपनी कॉन्ट्रैक्ट पर काम करवाती हैं।
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