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खाप ने क्यों बदली 500 साल पुरानी परंपरा?

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अक्सर ऑनर किलिंग के लिए चर्चा में रहने वाली खाप पंचायत ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए अपनी 500 साल पुरानी परंपरा को बदल दिया है।
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इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक सेक्स रेसियो यानि लिंगानुपात में लगातार गिरावट ने खाप को इस विषय पर सोचने को मजबूर कर दिया।

मेवात के जौरासी फतेहपुर गांव में धारीवाल गोत्र के लोग अधिकता में हैं। यहां की जाट खाप पंचायत ने 'पगड़ीबंदी' नामक 500 साल पुरानी परंपरा को बदलने का फैसला लिया है।

इस परंपरा के मुताबिक आस-पास रहने वाले पांच गांव के लड़के-लड़कियां आपस में शादी नहीं कर सकते थे। अब इस बाध्यता को समाप्त कर दिया गया है।

नजदीक के गांवों में हो सकेगी शादी

जौरासी गांव के सरपंच देवेंद्र धारीवाल ने बताया कि हमने महापंचायत का आयोजन किया जिसमें 12 गांवों का नेतृत्व करने वाले जौरासी फतेहपुर और 18 गांवों के चौधरी गुड़गांव गांव के बीच यह फैसला लिया गया कि अब इन जाट गांवों के बीच विवाह संबंध बनाने पर कोई पाबंदी नहीं होगी।

हालांकि सूत्रों का मानना है कि इस फैसले के पीछे तेजी से गिरता सेक्स रेसियो एक बड़ा कारण हो सकता है। गौरतलब है कि इस इलाके में वर्तमान लिंगानुपात 1000 पुरूषों पर 879 महिलाओं का है। इसके पीछे कन्या भ्रूण हत्या को सबसे बड़ा कारण माना जाता है।

80 वर्षीय पंचायत सदस्य वेद राम धारीवाल ने कहा कि पहली बार खाप ने ऐसा प्रगतिवादी फैसला लिया है। जाट समुदाय के लोग शादी-विवाह के मामलों में बहुत कठोर होते हैं लेकिन समय के साथ इसमें भी बदलाव आ रहा है।

युवाओं को अभी भी है एक बड़ी चिंता

हालांकि यहां के युवा अभी भी अपने बुजुर्गों से सहमत नहीं हैं। जौरासी के हाई स्कूल में पढ़ने वाली एक युवा लड़की ने कहा कि इस फैसले के बावजूद उन्हें कभी भी अपना मनपसंद जीवन साथी चुनने की आजादी नहीं दी जाएगी।

इतना ही नहीं एक छात्रा ने तो यह भी कहा कि लड़कियों से उनकी मर्जी पूछने की बात तो बहुत दूर है, हमें तो आज तक जौरासी गांव से बाहर जाने तक की इजाजत नहीं दी गई।

वेद राम का कहना है कि भले ही गांवों के बीच शादियों की अनुमति दे दी गई है लेकिन अभी भी एक ही गोत्र में शादी करने की इजाजत किसी को नहीं है।

वेद राम ने आगे कहा कि हम अभी भी समान गोत्र में शादी के खिलाफ हैं। पांच गावों के बीच शादी करने का फैसला उन युवाओं के लिए बेहतर साबित होगा जिन्हें सही लाइफ पार्टनर की तलाश में भटकना पड़ता है।
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इस फैसले से लड़कियों को मिलेगा फायदा

अभी तक जौरासी गांव के लोग अपनी बेटियों की शादी हरियाणा के पलवल और झज्‍जर गांव में करते थे। कुछ शादियां तो राजस्‍थान के कोट बासिम तक में हुई हैं।

स्‍थानीय लोगों का मानना है कि इस फैसले का असली फायदा लड़कियों को मिलेगा। पंचायत के एक वरिष्ठ सदस्य प्रहलाद धारीवाल की दो पोतियां हैं जिन्होंने हाल ही में एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की है।

उनका कहना है कि पहले हरियाणा में पढ़े-लिखे और अच्छे लड़के मिलना मुश्किल होता था लेकिन अब आस-पास के गांवों में अच्छे लड़कों की तलाश की जा सकती है।
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