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Khadi India: दुर्लभ फ्रैबिक वाली मणिपुरी कमल सिल्क की ब्रांडिंग-बिक्री करेगा खादी इंडिया, परिधान होंगे तैयार

Fri, 15 Sep 2023 09:50 AM IST
विजय पुंडीर सीमा शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

खादी और ग्रामोद्योग आयोग के अध्यक्ष मनोज कुमार ने बताया कि दुर्लभ और महंगे फैब्रिक में शुमार मणिपुरी कमल सिल्क को खादी इंडिया अपने प्रोडेक्ट की सूची में शामिल करने जा रहा है। इसकी ब्राडिंग के साथ खादी इंडिया के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शोरूम में बिक्री भी होगी।
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विस्तार
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दुनिया के सबसे महंगे और दुर्लभ फैब्रिक में शुमार मणिपुरी कमल सिल्क की ब्रांडिंग और बिक्री अब खादी इंडिया करेगा। खादी इंडिया मणिपुरी कमल और उसके डंठल के रेशों से तैयार होने वाली सिल्क को अपनी शोकेस लिस्ट में शामिल करने जा रहा है। औषधीय महत्व वाले कमल के रेशों से तैयार सिल्क से विभिन्न परिधान तैयार किए जाएंगे। इस काम में जुटी महिलाओं को सीधे-सीधे लाभ होगा। क्योंकि ब्राडिंग और डिजाइनर परिधान बनने से उनके उत्पाद की दुनियाभर में मांग बढ़ेगी।

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खादी और ग्रामोद्योग आयोग के अध्यक्ष मनोज कुमार ने बताया कि दुर्लभ और महंगे फैब्रिक में शुमार मणिपुरी कमल सिल्क को खादी इंडिया अपने प्रोडेक्ट की सूची में शामिल करने जा रहा है। इसकी ब्राडिंग के साथ खादी इंडिया के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शोरूम में बिक्री भी होगी। इसके डिजाइन में भी कमल का निशान होगा। इस प्रोडेक्ट को खादी में जोड़ने का मकसद इससे जुड़ी ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाना है। इसके अलावा ग्रामीण, दूरदराज के इलाकों की महिलाओं के लिए समृद्धि विकास योजना और युवाओं के लिए कुशल कारीगर विकास योजना को लॉन्च करने की तैयारी चल रही है। इसमें सभी राज्य सरकारों को शामिल किया जाएगा। राज्य सरकार के सहयोग से ही आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे। समृद्धि योजना में महिलाओं को कपड़े सिलने की ट्रेनिंग के बाद सिलाई मशीन दी जाएगी। इसके अलावा प्लंबर, कारपेंटर , मोबाइल मैकेनिक,एसी मैकेनिक, माली आदि को 10 दिन की ट्रेनिंग दी जाएगी। इसमें शामिल युवाओं को काम शुरू करने के लिए संबंधित काम की किट भी प्रदान होगी।

बुजुर्ग महिला से मिला विचार, शोध के बाद मंजूरी
विजयशांति टोंगब्रम को कमल के डंठल से सूत कातने का आइडिया एक बुजुर्ग महिला से मिला था। दरअसल, इस इलाके की लोकटक झील में भारी मात्रा में कमल के फूल उगते हैं। इसीलिए वनस्पति विज्ञान में स्नातक विजय शांति ने इंटरनेट से ही उत्पादन पद्धति के बारे में जाना और शिक्षकों से राय ली। हालांकि, काम शुरू करने से पहले शोध किया। इसमें कपड़ा कितना मजबूत, टिकाऊ और स्वास्थ्य के आधार पर ठीक रहेगा आदि की जांच की । इसके लिए सैंपल को गुजरात की लैब में भेजा और उन्हें मंजूरी दे दी। साल 2018-19 में विजय शांति ने कमल के तने से धागा और कपड़ा बनाने का काम शुरू किया था। इसमें आसपास की ग्रामीण महिलाओं को जोड़ा, ताकि वे भी आत्मनिर्भर बन सकें। विजय शांति की कमल सिल्क से तैयार जैकेट 25 हजार से 30 हजार रुपये के बीच बिकती है। इसे बनाने में बहुत अधिक समय और मेहनत लगती है। इसी कारण यह कमल सिल्क दुनिया के सबसे महंगे और दुर्लभ प्रोडेक्ट में शुमार है। हालांकि खादी का नाम जुड़ने से अब उन्हें ओर अधिक फायदा होगा।
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पीएम ने ‘मन की बात’ में सिल्क उद्यमी की तारीफ की थी 
प्रधानमंत्री ने अप्रैल में ‘मन की बात ’के 100वें एपिसोड में मणिपुरी के बिष्णुपुर जिले की महिला उद्यमी तोंगब्रम बिजय शांति देवी (27) द्वारा कमल के तने के रेशों को निकालकर सिल्क बनाने का जिक्र किया था। उसी मणिपुरी कमल सिल्क को अब खादी और ग्रामौद्योग अपने प्रोडेक्ट की सूची में शामिल करने जा रहा है। पीएम ने लोगों को विजय के काम की तारीफ करते हुए कहा था कि कमल के डंठल से सूत कातकर धागा और कपड़ा बुनने का स्टार्टअप स्थापित करके खुद और आसपास की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया है।

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