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केंद्र के खिलाफ नया दांव आजमाएंगे केजरीवाल

Mon, 25 May 2015 04:36 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार की तकरार अभी थमती दिखाई नहीं पड़ रही है। केंद्रीय गृहमंत्रालय ने जहां यह अधिसूचना जारी कर दिल्ली के उपराज्यपाल की शक्तियों पर मुहर लगाने का निर्णय लिया, तो वहीं दिल्ली कैबिनेट ने दिल्ली विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का फैसला किया है।
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मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता में दिल्ली कैबिनेट की बैठक शनिवार को हुई। जहां दो दिनों के लिए विधानसभा के विशेष सत्र को आहूत करने का निर्णय लिया गया है।

मंगलवार और बुधवार (26-27 मई) को विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा। बैठक में संविधान विशेषज्ञ केके वेणुगोपाल और पूर्व सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया गोपाल सुब्रह्मण्यम की कानूनी राय भी कैबिनेट के समक्ष रखी गई और दोनों विशेषज्ञों की राय पर चर्चा की गई।
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इसमें निर्णय लिया गया कि अगर जरूरत पड़ी तो दो दिनों के सत्र को आगे बढ़ाया जा सकता है। सरकार के सूत्रों की मानें तो केजरीवाल विशेष सत्र बुलाकर केंद्र सरकार के खिलाफ प्रस्ताव पेश कर सकते हैं। साथ ही निंदा प्रस्ताव भी पास करा सकते हैं।
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इस मोर्चे पर हो सकते हैं फेल

इस दौरान केजरीवाल चर्चा कराकर यह साबित करने की कोशिश करेंगे कि दिल्ली की चुनी हुई सरकार अपना फैसला नहीं ले सकती और इसमें केंद्र सरकार का हस्तक्षेप होता है।

राजनीतिक लड़ाई को केजरीवाल विधानसभा का चेहरा बनाकर लड़ने की मुहिम में है। विशेष सत्र में केजरीवाल दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग भी कर सकते हैं।

दिल्ली संविधान के जानकार एसके शर्मा का कहना है कि केंद्र शासित प्रदेश की सरकार विधानसभा में कोई भी प्रस्ताव लाए उसे मानने के लिए केंद्र सरकार बाध्य नहीं है। प्रस्ताव पारित करना महज औपचारिकता मात्र है। वहीं, अगर केंद्रीय गृहमंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर उपराज्यपाल के अधिकार को इंगित कर दिया है तो उसको प्रस्ताव लाकर खत्म नहीं किया जा सकता है।

इस तरह के हजारों प्रस्ताव दिल्ली की पूर्व सरकारों ने पारित किया है, लेकिन इसका कोई औचित्य नहीं है। दरअसल विधानसभा को चेहरा बनाकर केंद्र से लड़ने की राजनीति है।
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